
लखनऊ।।प्रदेश अध्यक्ष पर मंथन तेज ब्रजेश पाठक पर केंद्र की नजर।सूत्रों की माना जाए तो प्रदेश अध्यक्ष की दौड़ में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का नाम सबसे आगे बताया जा रहा है। हाल के राजनीतिक संकेत भी यही दिशा दिखाते हैं। उनकी तेज छवि, जनता से जुड़ाव और पश्चिम से पूर्वांचल तक ब्राह्मण समाज में पकड़ उन्हें मजबूत दावेदार बनाती है। नौ साल में उन्होंने भाजपा और आरएसएस में अपनी स्थिति मजबूत की है और उन्हें पीएम मोदी, अमित शाह और जेपी नड्डा का भरोसेमंद नेता माना जाता है। हालांकि 2016 में बसपा से भाजपा में आए पाठक को प्रदेश अध्यक्ष बनाने पर पार्टी के पुराने कैडर में असहजता की संभावना भी बनी रहती है। यूपी भाजपा अध्यक्ष की नियुक्ति 15 जनवरी 2025 को तय थी, लेकिन महाराष्ट्र चुनाव, यूपी उपचुनाव और फिर बिहार चुनाव की वजह से यह फैसला लगातार टलता गया। यह पद केवल प्रदेश संगठन तक सीमित नहीं है, बल्कि पार्टी की राष्ट्रीय रणनीति में भी अहम भूमिका रखता है। इसलिए केंद्रीय नेतृत्व सभी पहलुओं को तौलकर ही निर्णय लेना चाहता है।दिल्ली में कई दौर की चर्चा के बाद भी नियुक्ति अटकी रही, लेकिन अब बिहार चुनाव खत्म होने के बाद लखनऊ से दिल्ली तक इस मुद्दे पर तेजी दिख रही है। संकेत हैं कि प्रदेश अध्यक्ष की घोषणा और मंत्रिमंडल विस्तार दोनों दिसंबर में संभव हैं। पार्टी के एक प्रदेश पदाधिकारी बताते हैं कि नियुक्ति लगभग 11 महीने से लंबित है। अप्रैल से पंचायत चुनावों की तैयारी शुरू हो जाएगी, इसके बाद विधान परिषद के स्नातक और शिक्षक क्षेत्र के चुनाव और फिर विधानसभा चुनाव का दौर आएगा। ऐसे में और देरी का सीधा असर संगठन की गति पर पड़ेगा।
इस बीच भाजपा हाईकमान आगामी यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों में पहले ही जुट चुका है। नया प्रदेश अध्यक्ष पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा होगा। अब नजर इस बात पर है कि नेतृत्व अंतिम चुनाव किसके पक्ष में करता है।


