
जिला संवाददाता देवेंद्र तिवारी
उन्नाव।।जिले में डेंगू का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। चिलौला गांव निवासी रामेंद्र कुशवाहा (32) की डेंगू से मौत ने पूरे इलाके में हड़कंप मचा दिया है। परिजनों का आरोप है कि इलाज के दौरान समय रहते जरूरी इंतजाम नहीं किए गए, और स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी अब जानलेवा साबित हो रही है।
जानकारी के मुताबिक, रामेंद्र पिछले कुछ दिनों से बुखार से पीड़ित थे। पहले उन्हें स्थानीय डॉक्टर को दिखाया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर उत्तम हॉस्पिटल, उन्नाव में भर्ती कराया गया। जाँच में डेंगू की पुष्टि हुई। इलाज के दौरान उनकी प्लेटलेट्स 10 हजार से नीचे पहुंच गईं। डॉक्टरों ने प्लेटलेट्स चढ़ाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। रविवार रात रामेंद्र ने दम तोड़ दिया।
गांव में पसरा मातम, उभरा आक्रोश
रामेंद्र की मौत की खबर मिलते ही गांव में कोहराम मच गया। परिजन सदमे में हैं और ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। लोगों का आरोप है कि गांव में ना तो फॉगिंग कराई गई, न ही मच्छरनाशक दवाओं का छिड़काव हुआ। जगह-जगह गंदगी और जलभराव ने मच्छरों को खुला न्योता दिया है।
प्रशासन पर सवाल, सिस्टम बेपरवाह?
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा अगर समय रहते एहतियाती कदम उठाए जाते, तो रामेंद्र की जान बचाई जा सकती थी। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही अब जान पर बन आई है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तत्काल प्रभाव से फॉगिंग, सफाई और डेंगू नियंत्रण की ठोस व्यवस्था लागू की जाए।
स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप
घटना के बाद मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में हलचल तेज हो गई है। सीएमओ डॉ. सत्यप्रकाश ने कहा कि जिले में डेंगू के मामलों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने दावा किया कि फॉगिंग, दवा छिड़काव और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। साथ ही, उन्होंने लोगों से अपील की कि वे मच्छरों से बचने के लिए सावधानी बरतें, जैसे पानी इकट्ठा न होने देना और पूरी आस्तीन के कपड़े पहनना।
डेंगू की मार, प्रशासन लाचार!
जब तक फील्ड में ज़मीनी काम नहीं होंगे, तब तक रिपोर्ट और दावे सिर्फ कागज़ों तक ही सीमित रहेंगे।



