संवाददाता सचिन पाण्डेय
उन्नाव।।
उन्नाव में साइबर अपराधियों का गिरोह, जिनकी चालें अब पुलिस की गिरफ्त में
उन्नाव के थाना अजगैन में भी कोई बड़ी हलचल नहीं थी। पर एक सुबह, जब पूरा शहर अपनी धड़कनों में खोया था, एक और ताजे मामले ने सुर्खियां बना दीं।
यह सुबह कुछ खास थी।
शहर के बीचों-बीच, जहां पुलिस की गश्त अक्सर चुपचाप निकल जाती है, वहीं एक साइबर अपराध का मामला सामने आया। एक नामी व्यापारी की तहरीर से शुरू हुआ यह मामला अब एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश करने तक पहुँच चुका था।
5 अक्टूबर को जब नन्हकऊ प्रसाद ने पुलिस से शिकायत की कि उनके बैंक खाते से एक लाख रुपये गायब हो गए, तो कोई नहीं जानता था कि यह सिर्फ एक शुरुआत होगी। नन्हकऊ ने बताया कि आरोपी ने उनकी बैंक डिटेल्स हासिल की और फिर बिना किसी रुकावट के पैसे ट्रांसफर कर दिए।
नाम था अमित – उम्र 27 साल, घर था भवानीपुर, और गढ़ था साइबर ठगी का।
जांच के दौरान पुलिस ने अमित और उसके साथियों को गिरफ्तार किया, जो लंबे समय से इस अपराध में लिप्त थे। दनिश, अमान, वंश, अंकुश और राहुल जैसे और नाम सामने आए, जिनके हाथों में उन मासूमों के खातों का हिसाब था, जिनसे पैसे हर रोज़ चोरी हो रहे थे।
गिरफ्तार हुए आरोपियों में थे
अमित पुत्र सरजू प्रसाद (उम्र 27)
अंकुश पुत्र जमुना प्रसाद (उम्र 21)
राहुल शर्मा पुत्र देवी शंकर (उम्र 37)
गांव का एक बाल अपचारी भी था, जो इस गिरोह का हिस्सा था। उसकी उम्र भले ही कम हो, लेकिन अपराध की दुनिया में उसका नाम बड़ा हो चुका था।
अब सवाल यह है – क्या इन लोगों की पकड़ सिर्फ उन्नाव तक थी? या फिर कहीं और भी ये अपराधियों का जाल फैला हुआ था?
कोतवाली प्रभारी अजय सिंह ने बताया “मामले की गहन जांच की जा रही है। अभी और गिरफ्तारियाँ हो सकती हैं। ये गिरोह कई लोगों के खाते से पैसे निकालने के बाद अपना हिस्सा आपस में बांटते थे।”
गांव में लोग कहते हैं – यह गिरोह सिर्फ पैसों के लिए नहीं, बल्कि लोगों के विश्वास को भी तोड़ रहा था।
और अब
साइबर दुनिया का यह मुसाफिर, जिनके हाथों में अक्सर चुराए गए पैसों का हिसाब था, अब पुलिस के शिकंजे में है।
इस गिरोह की खामोश आवाज़ें अब सुनाई देंगी, लेकिन उन्नाव के इस मुकाम तक आने तक यह गिरोह एक खामोश क़िस्से की तरह था।



