
लखनऊ। देश की शिक्षा व्यवस्था को झकझोर देने वाला एक अत्यंत संवेदनशील और क्रूर मामला राजधानी लखनऊ जानकीपुरम विस्तार के प्रतिष्ठित सेंट मैरी स्कूल से सामने आया है। कक्षा 5 में पढ़ने वाली एक छात्रा को उसकी फीस पहले से जमा होने के बावजूद, स्कूल की एक शिक्षिका ने न केवल परीक्षा देने से रोका, बल्कि उसे पूरी क्लास के सामने अपमानित करते हुए कमरे से बाहर निकाल दिया। बच्ची ने बार-बार गुहार लगाई कि फीस 25 सितंबर को ही जमा हो चुकी है (जबकि ड्यू डेट 10 अक्टूबर थी), लेकिन शिक्षिका ने उसकी एक न सुनी और अमानवीय व्यवहार किया।
बच्चा सदमे में, सीधा मौलिक अधिकारों का उल्लंघन
अभिभावकों ने रोष व्यक्त करते हुए बताया कि इस बर्बर व्यवहार से बच्ची गंभीर मानसिक तनाव और सदमे में है। यह कृत्य सिर्फ एक अनुशासनहीनता नहीं है, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त शिक्षा के मौलिक अधिकार (Article 21A) और सम्मान के साथ जीने के अधिकार का खुला उल्लंघन है।
अभिभावकों का तीखा सवाल:
“जब फीस जमा है, और बच्ची चिल्ला-चिल्लाकर कह रही है, तब भी उसे एग्जाम हॉल से खींचकर बाहर निकालना और सबके सामने बेइज्जत करना क्या दर्शाता है? यह दिखाता है कि स्कूल प्रबंधन और कुछ शिक्षकों के लिए बच्चों की मानसिकता और भविष्य से ज़्यादा महत्वपूर्ण उनकी निजी मनमानी है।”
कानूनी शिकंजा कसने की मांग: अब होगी सीधी आपराधिक कार्रवाई
यह घटना केवल शिक्षा विभाग के नियमों का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह सीधे-सीधे आपराधिक श्रेणी में आती है।
** किशोर न्याय अधिनियम (JJ Act), 2015 की धारा 75*
शिक्षिका का यह कृत्य बच्चे को जानबूझकर मानसिक और शारीरिक कष्ट देने की श्रेणी में आता है। इस धारा के तहत, आरोपी शिक्षिका और स्कूल प्रबंधन पर आपराधिक मुकदमा दर्ज हो सकता है, जिसमें 3 साल तक की कैद और भारी जुर्माना का प्रावधान है।
- RTE अधिनियम, 2009: शिक्षा का अधिकार कानून की धारा 17 शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न को पूर्णतः प्रतिबंधित करती है। इस उल्लंघन के लिए स्कूल की मान्यता तत्काल रद्द करने की प्रक्रिया शुरू होनी चाहिए।
- उच्च न्यायालय की अवमानना: देश के कई उच्च न्यायालयों ने स्पष्ट किया है कि फीस न जमा होने पर भी बच्चे को शिक्षा और परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता। फीस जमा होने के बावजूद यह करना न्यायिक निर्देशों की घोर अवहेलना है।
त्वरित और सख्त कार्रवाई की माँग
लखनऊ पुलिस, जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) और राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग (SCPCR) को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेना चाहिए: - ➡️ तत्काल FIR दर्ज हो: संबंधित शिक्षिका के खिलाफ और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ किशोर न्याय अधिनियम की धाराओं के तहत तुरंत FIR दर्ज की जाए।
- ➡️ शिक्षिका को बर्खास्त किया जाए: ऐसी क्रूर मानसिकता वाली शिक्षिका को तुरंत शिक्षण कार्य से बर्खास्त (Dismiss) किया जाए, ताकि वह किसी अन्य बच्चे को क्षति न पहुंचा सके।
- ➡️ स्कूल पर भारी जुर्माना: सेंट मैरी स्कूल पर मनमानी और नियमों के घोर उल्लंघन के लिए भारी आर्थिक दंड लगाया जाए।
यह मामला केवल एक बच्ची का नहीं, बल्कि लाखों अभिभावकों की चिंता का विषय है। राजधानी में हुई इस घटना पर यदि सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो मनमानी करने वाले अन्य स्कूलों को भी खुली छूट मिल जाएगी। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि किसी भी बच्चे के साथ भविष्य में इस तरह की बच्चों-लखी (Childish/Cruel) हरकत न हो।
अब देखना यह है कि लखनऊ प्रशासन इस जघन्य कृत्य पर कितनी तेज़ी और सख्ती से ‘कानूनी सेंजा’ कसता है। ⚖️
