
लखनऊ/पटना। निषाद पार्टी-राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद ने कहा “बिहार और उत्तर प्रदेश की मिट्टी, संस्कृति और संवेदना एक है, मछुआ समाज के अधिकार की लड़ाई दोनों राज्यों में समान रूप से लड़ी जाएगी।”
आज पटना सर्किट हाउस में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार में मत्स्य मंत्री एवं निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार निषाद ने कहा कि बिहार की यह पवित्र धरती हमारे लिए तीर्थ समान है। यहाँ की नदियाँ गंगा, सोन, गंडक और सरयू केवल जलधारा नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता और संस्कृति की जीवनधारा हैं। इन नदियों ने उत्तर प्रदेश और बिहार को जोड़ा है। दोनों राज्यों की मिट्टी, भाषा, परंपरा और संस्कृति एक ही है, इसलिए कहा जाता है कि “बिहार और उत्तर प्रदेश में रोटी-बेटी का रिश्ता है।”l
मंत्री ने कहा कि निषाद, मछुआ, केवट, मल्लाह, बिन्द, तुरैहा, कहार, गोंड चाहे किसी भी नाम से पुकारे जाएँ, हम सब एक ही समाज के लोग हैं जिन्होंने सदियों से इस देश की नदियों, तालाबों और जलाशयों से जीवन यापन किया है। परंतु आज भी यह समाज अपने संवैधानिक अधिकार अनुसूचित जाति के दर्जे और आरक्षण से वंचित है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश और बिहार दोनों राज्यों में मछुआ समाज के साथ समान अन्याय हो रहा है। “हम मेहनत करते हैं, मछली पालते हैं, देश को भोजन देते हैं, लेकिन अपने अधिकारों से वंचित हैं। यह अन्याय अब और नहीं चलेगा।
डॉ. निषाद ने कहा कि उत्तर प्रदेश में जिस तरह निषाद पार्टी समाज के अधिकार के लिए संघर्ष कर रही है, वही लड़ाई अब बिहार के मछुआ समाज के लिए भी लड़ी जाएगी। उन्होंने कहा कि यह संघर्ष केवल किसी राज्य या पार्टी का नहीं बल्कि पूरे देश के मछुआ समाज का है।
उन्होंने सभी निषाद समाज के नेताओं, जनप्रतिनिधियों और संगठनों से आह्वान किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर आरक्षण की माँग पर एक मंच पर आएँ। मंत्री ने कहा, जब हम सब एक स्वर में, एक दिशा में आगे बढ़ेंगे, तब सरकार को समाज के आरक्षण संबंधी मांग पर निर्णायक कदम उठाना ही पड़ेगा।”उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में केंद्र एवं राज्य सरकारों ने मत्स्यपालन के क्षेत्र में मछुआ समाज के विकास के लिए प्रधानमंत्री मछुआ दुर्घटना बीमा योजना, किसान क्रेडिट कार्ड (मत्स्य पालन क्षेत्र हेतु), मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना, निषाद राज बोट योजना, माता सुकेता केज कल्चर, सघन मत्स्य पालन हेतु एरियेशन, मोपेड विथ आइस बॉक्स, ग्राम समाज तालाब पट्टा, एनएफडीबी पंजीकरण, सहकारी समितियों का गठन एवं पंजीकरण और प्रशिक्षण कार्यक्रम जैसी कई योजनाएँ चलाई हैं, जिनसे मछुआ समाज को लाभ मिल रहा है। परंतु उन्होंने यह भी कहा कि जब तक समाज को संवैधानिक हक — आरक्षण — नहीं मिलेगा, तब तक हमारे बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता।
अंत में मंत्री ने कहा “गंगा, सरयू, सोन और गंडक के इस पार आप हैं, उस पार हम हैं, लेकिन हमारा दिल, हमारी आत्मा और हमारा उद्देश्य एक है। हम सब मिलकर समाज को सम्मान और अधिकार दिलाएँगे। और वह दिन दूर नहीं जब संसद और विधानसभाओं में समाज की यह आवाज़ गूंजेगी — आरक्षण हमारा अधिकार है, भीख नहीं।”

