
ब्यूरो ऋषभ तिवारी
उन्नाव के नवाबगंज में भू-माफियाओं ने एक बार फिर अपनी ताकत का नंगा नाच दिखाया और सरकारी ज़मीन पर कब्जा कर लिया। लेकिन प्रशासन अब चुप नहीं बैठने वाला है। विधायक बृजेश रावत के तीखे सवालों के बाद, शासन ने तुरंत एक जांच टीम बनाई और कार्रवाई शुरू की।
जांच में खुलासा हुआ कि चार प्रमुख स्थानों पर अवैध कब्जे हो रहे थे:
जगदीशपुर में चाय कंपनी ने चकरोड पर कब्जा कर लिया।
गौरा कठेरुआ में अल्ट्राटेक सीमेंट की कंपनी ने सरकारी ज़मीन हड़प ली।
अजगैन के पास एक प्लॉटिंग और जैतीपुर मार्ग पर सेमडे नामक प्लॉटिंग में ग्राम समाज की ज़मीन पर कब्जा किया गया।
सेमडे प्लॉटिंग में तो अमरेथा और कुसुम्भी ग्राम पंचायतों की ज़मीन तक कब्ज़े में थी।
यह न सिर्फ़ कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह सरकारी ज़मीन की लूट है, जिसे माफिया ने लंबे समय से अपनी जेब में डाला हुआ था। लेकिन प्रशासन अब बर्दाश्त करने वाला नहीं। हसनगंज की उपजिलाधिकारी प्रज्ञा पाण्डेय और तहसीलदार अवनीश चौधरी को सख्त आदेश दिए गए हैं कि सभी कब्जों को तत्काल हटाया जाए।
प्रशासन ने अब तक जो कदम उठाए हैं, उससे साफ है कि सरकार भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का मन बना चुकी है। जांच टीम ने सेमडे प्लॉटिंग में तो कुछ हिस्सों को हटवाकर यह दिखा दिया कि अब कोई भी माफिया अपनी ज़मीन हड़पने की हिम्मत नहीं कर पाएगा।
लेकिन यह सवाल खड़ा होता है कि क्या प्रशासन का यह कदम पर्याप्त है? *क्यों इतने सालों तक प्रशासन ने इन कब्जों को अनदेखा किया? क्या सत्ता में बैठे लोग इस खेल में शामिल थे? अब जो भी हो, प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया है कि भू-माफियाओं को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
अधिकारियों का कहना है कि कब्जाधारी अब अपनी ज़मीन का विनिमय कर सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें प्रार्थना पत्र देना होगा।
अब यह देखना बाकी है कि क्या सरकार इन भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कदम उठाती है, या फिर यह सब कागजी खानापूरी बनकर रह जाएगा।
भू-माफियाओं की इस लूट को खत्म करने के लिए प्रशासन ने कमर कस ली है। अगर सरकार इस बार भी इसे नज़रअंदाज करती है, तो जनता का विश्वास पूरी तरह से टूट जाएगा।



