
लखनऊ,
संवाददाता इरफान कुरैशी,
लखनऊ,वह शहर र्जो तहज़ीब-ओ-नफ़ासत का आलम लिए हर दिल में बस्ता है, एक बार फिर अपनी रवायती शान से जगमगा उठा। आज़ादी के 79वें जश्न के मौक़े पर, जब सारा मुल्क तिरंगे की रंगत में डूबा था, अमीनाबाद थाने के चौकी इंचार्ज आशीष कुमार सिंह,व पवन कुमार दीवान ने एक ऐसी मिसाल क़ायम की, जिसने हर शख़्स के दिल को छू लिया। यह सिर्फ़ एक सरकारी फ़र्ज़ की अदायगी नहीं थी, बल्कि इंसानियत, हमदर्दी और वतनपरस्ती का एक ज़िंदादिल पैग़ाम था, जो लखनऊ की गंगा-जमुनी तहज़ीब की रूह को बयान करता है।हर साल 15 अगस्त को हम आज़ादी का जश्न मनाते हैं, मगर इस बार आशीष कुमार सिंह ने इस जश्न को उन बस्तियों तक पहुंचाया, जहां खुशियां अक्सर मेहमान नहीं बनतीं। मौलवीगंज की तंग गलियों में, जहां ज़िंदगी की जद्दोजहद हर चेहरे पर नक़्श है, उन्होंने अपनी पुलिस टीम के साथ क़दम रखा। उनके हाथों में तिरंगे थे, वह तिरंगे जो सिर्फ़ कपड़े का टुकड़ा नहीं, बल्कि आज़ादी की क़ुर्बानियों और मुल्क की शान का निशान हैं। बच्चों के नन्हे हाथों में तिरंगा थमाकर, बुज़ुर्गों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरकर, मिठाइयां और ज़रूरी सामान तक़सीम कर, उन्होंने न सिर्फ़ खुशियां बांटीं, बल्कि एक नई उम्मीद जगाई। इन नेक एहसासात ने उन चेहरों को रौशन किया, जो आमतौर पर ज़िंदगी की कशमकश में खामोश रहते हैं,

