
संवाददाता सचिन पाण्डेय
उन्नाव।
लखनऊ-कानपुर राजमार्ग अब सिर्फ गाड़ियों के चलने का रास्ता नहीं, बल्कि अब काले कारोबार की खुली मंडी बन चुका है। गंगापुल से लेकर बनीपुल तक—सरिया, पेट्रोल-डीजल, और अब तो चर्बी से बनी मिलावटी चीजों का बाजार जमकर फलफूल रहा है। अजगैन, दही चौकी से लेकर सोहरामऊ तक, राजमार्ग के हर कोने पर चलता है ये गोरखधंधा। पेट्रोल-डीजल को ट्रकों से उतारकर रात के अंधेरे में उन ढाबों पर पहुंचाया जाता है, जहां दिन में परोसा जाता है खाना, और रात को बेचा जाता है ज़हर.
सोहरामऊ का प्रियंकाढाबा जो की पूर्व में भी कार्रवाई हो चुकी है एक ढाबा बना संदिग्ध केंद्र , जिस पर पुलिस कई बार छापा मार चुकी है, लेकिन हर बार मामला ठंडे बस्ते में। ग्रामीण बताते हैं— जैतीपुर से लेकर छोटे गाँवों तक गुमटियों और दुकानों में खुलेआम बेचा जा रहा है मिलावटी डीज़ल और पेट्रोल। यहां तक कि नवाबगंज की एक बंद पड़ी टंकी पर फिर से चालू हो गया है अवैध कारोबार का अड्डा।

चर्बी से बना “खाना”
बात यहीं नहीं रुकती! इलाके में अब जानवरों की चर्बी का इस्तेमाल खाने-पीने की चीज़ों में किया जा रहा है। घी, तेल और फर्सनिष ऑयल में मिलावट कर उसे सस्ते दाम पर बेच दिया जाता है। नतीजा? लोगों की सेहत पर सीधा वार। पेट की बीमारियां, फूड पॉइजनिंग और बच्चों में गिरती सेहत इसकी खौफनाक मिसालें हैं।
पुलिस का पल्ला झाड़ना!
सोहरामऊ थाना पुलिस से इस काले कारोबार पर सवाल किए तो जवाब मिला—“अब तक कोई शिकायत नहीं मिली है। सूचना नहीं है।”तो क्या जब तक कोई मर न जाए, पुलिस सिर्फ तमाशबीन बनी रहेगी?
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा कहा: “गरीब सड़क पर सामान बेचे तो चालान, और ये मिलावटखोर खुलेआम ज़हर बेचें तो सब चुप?”
किसकी मिलीभगत से फल-फूल रहा है ये अवैध धंधा?
क्यों नहीं हो रही ताबड़तोड़ रेड और गिरफ़्तारी?
आम जनता की सेहत से खिलवाड़ करने वालों पर आखिर कब चलेगा डंडा? हर खबर की नजर उन्नाव की टीम इस मामले पर लगातार नज़र रखे हुए है। आने वाले दिनों में और खुलासे होंगे।
इस रिपोर्ट में उजागर किए गए नाम, स्थान और घटनाएं क्षेत्रीय स्रोतों व स्थानीय लोगों की शिकायतों पर आधारित हैं। प्रशासन और पुलिस से आग्रह है कि इस मामले में कठोर कार्रवाई की जाए।

