
लखनऊ।।अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद,अवध प्रांत, द्वारा 31 मई 2024 से चल रहे पुण्य श्लोका अहिल्याबाई होकलर त्रिशताब्दी वर्ष का समापन समारोह लखनऊ विश्वविद्यालय के ए०पी०सेन सभागार में संपन्न हुआ जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश महिल आयोग की उपाध्यक्ष अपर्णा यादव,मुख्य वक्ता अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद पूर्वी उत्तर प्रदेश,के क्षेत्रीय संगठन मंत्री घनश्याम शाही,विशिष्ट अतिथि समाज सेवी निमेष मिश्रा, अभाविप अवध प्रांत की अध्यक्ष प्रो० नीतू सिंह,प्रांत मंत्री पुष्पेंद्र बाजपाई,लखनऊ महानगर अध्यक्ष डॉ० भुनेश्वरी भारद्वाज,महानगर मंत्री शाश्वत संस्कृत ने एक साथ युवाओं के प्रेरणास्रोत स्वामी विवेकानंद एवं ज्ञान की देवी मां सरस्वती के चित्र के समक्ष पुष्पार्चन कर दीप प्रज्वलित किया।

पुण्य श्लोका अहिल्याबाई होकलर त्रिशताब्दी वर्ष समापन समारोह में उपस्थित युवा तरुनाई को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि अपर्णा यादव ने कहा किक्यूं आज के समय में पुण्य श्लोका अहिल्याबाई को सिर्फ अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता ही याद करते हैं,क्योंकि 9 जुलाई 1949 में जब अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की संगठनात्मक नींव रखी गई तो तीन सबसे बड़े मुद्दे रखे गए नारी शिक्षा,नारी उत्थान,एवं नारी सशक्तिकरण जिसके जीवंत उदाहरण के रूप में हम महारानी पुण्य श्लोका अहिल्याबाई होकलर को याद करते हैं। उस परम शक्ति ने हर युग में, युग परिवर्तन, युग नवनिर्माण हेतु नारी को अपनी विशिष्ट शक्तियाँ, गुण, बल, सामर्थ्य देकर अपने निर्दिष्ट कार्य हेतु धरती पर अवतरित कराया। ईश्वर द्वारा चुनी हुई नारी ने भी अपने अंतर ज्ञान, भक्ति, कर्म – कौशल, बल, साहस तथा अंतरात्मा की आवाज पर जीवन जीते हुए, धरती के अशुभ, अमंगल, असत्य, अज्ञान, अंधकार की शक्तियों को पराजित करते हुए अपने ईश्वर प्रदत्त कर्म को धरती पर पूरी आस्था और विश्वास के साथ सम्पन्न किया।श्री मां ने कहा है “नारी के अंदर अलौकिक आध्यात्मिक शक्ति है। चैत्य शक्ति है। परमात्मा ने नारी को अतिविशिष्ट शक्ति प्रदान की है। वह है – उसकी विकसित अंतरात्मा । विकसित चैत्य पुरुष। यह उसके अंदर ईश्वर प्रदत्त क्षमता है। नारियों में यह शक्ति ज्यादा केंद्रित है। पुरुषों की अपेक्षा अधिक विकसित और समृद्ध शक्ति है। नारियाँ इसे अपने अंदर अभिव्यक्त करने में ज्यादा सक्षम और योग्य है। किंतु नारी अपने अंदर इस भागवत शक्ति की दिव्य क्षमता के प्रति सचेतन नहीं है। और इस क्षमता को उसने अपने अंदर उस सीमा तक अभिव्यक्त नहीं किया है जो उसे करना चाहिये या जो प्रत्येक नारी को करना है।

मुख्य वक्ता घनश्याम शाही महारानी अहिल्याबाई के विचारों को याद करते हुए कहा कि पुण्यश्लोका अहिल्याबाई होलकर के जीवन दृष्टि कार्य और यदि उनके संपूर्ण जीवन का अवलोकन करते हैं तो हमें यह देखने को मिलता है कि उनका जीवन कैसा था वह किस परिवार की थी उनका लालन -पालन कैसे हुआ इनका जीवन किस तरह से बीता।
इनका संस्मरण जीवन शैली इस बात का पर्याय है कि किस प्रकार से हमारे मन में समाज के उत्थान की जिज्ञासा जागृत होती है।
क्षेत्रीय संगठन मंत्री ने आगे पुण्य श्लोका के आदर्श वचनों को याद करते हुए कहा कि हमारी प्रशस्ति तब है जब मैं भगवान शिव और उनके शिवालय का कायाकल्प कर सकूं,शाही ने आगे अपने संबोधन में कहा कि महारानी अहिल्याबाई का सबसे बड़ा योगदान धार्मिक कार्यों और परोपकार में था। उन्होंने कई मंदिरों का निर्माण और जीर्णोद्धार कराया, जिनमें काशी विश्वनाथ मंदिर, सोमनाथ मंदिर, और विष्णुपद मंदिर शामिल हैं. उन्होंने तीर्थ स्थलों पर धर्मशालाएं और घाट भी बनवाए, जिससे तीर्थ यात्रियों को सुविधाएं हो सके।अहिल्याबाई की महानता उनकी धार्मिकता, परोपकार,और न्यायप्रियता में निहित है। उनकी याद में आज भी मंदिरों और घाटों का निर्माण किया जाता है,और उन्हें ‘लोकमाता’ के रूप में याद किया जाता है।

अभाविप अवध प्रांत की अध्यक्ष प्रो० नीतू सिंह ने कहा कि आज राजमाता महारानी अहिल्याबाई होकलर के त्रिशताब्दी वर्ष का समापन दिवस है यह दिन इस लिए काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि आज हम यानि कि अखिल भारतीय विद्यार्थी के कार्यकर्ताओं ने पूरे एक वर्ष पुण्य श्लोका अहिल्याबाई होकलर त्रिशताब्दी दिवस के समापन में यह जानेंगे कि हमने पूरे एक वर्ष में पुण्य श्लोका के विचारों से प्रेरणा लेकर क्या किए और हमको और आगे क्या करने की आवश्यकता है।
लोकमाता अहिल्याबाई होलकर की 300वीं जयंती पर विशेष
भारत ऐसे ही विश्व गुरु नहीं बना था। यहां की महिलाओं ने इतिहास में वह स्थान अर्जित किया है जिससे देवता भी वंचित रहे हैं। लौह महिला महारानी अहिल्याबाई होल्कर का व्यक्तित्व व कृतित्व उन्हें विश्व की श्रेष्ठतम महिलाओं की पंक्ति में अग्रणी बनाता है जिनका भारत के इतिहास और जनमानस पर विशेष प्रभाव रहा है। विश्व के सबसे बड़े महिला संगठन राष्ट्र सेविका समिति कर्तृत्व के आदर्श के रूप में लोकमाता अहिल्याबाई होलकर का अनुसरण करती है।
प्रांत मंत्री पुष्पेंद्र बाजपाई ने पुण्य श्लोका अहिल्याबाई होकलर को याद कर भारतीय सेना द्वारा पाकिस्तान पर चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर का नेतृत्व करने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की कुशल लीडरशिप और सफल अभियान पर नारी शक्ति सराहा और नमन किया ।
कार्यक्रम का प्रास्ताविक अभाविप लखनऊ महानगर की अध्यक्ष डॉ० भुनेश्वरी भारद्वाज ने रखी एवं आभार ज्ञापन महानगर मंत्री शाश्वत संस्कृत ने किया तथा संपूर्ण कार्यक्रम का संचालन आराध्या सिंह ने किया ।
इस पुण्य श्लोका अहिल्याबाई होकलर त्रिशताब्दी वर्ष समापन समारोह में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के राष्ट्रीय मंत्री अंकित शुक्ल,प्रांत उपाध्यक्ष प्रो० मंजुला उपाध्याय, सहित सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

