
सुल्तानपुर : भारतीय जनता पार्टी की कोषाध्यक्ष पूजा कसौंधन द्वारा दलित युवक को पुलिस स्टेशन में थप्पड़ मारने के मामले में आखिरकार खाकी का झुकाव साफ देखा गया है। एससी एसटी एक्ट से बचाव करते हुए प्रार्थना पत्र में उसे जुड़े बयान अलग करके तहरीर प्राप्त की गई। पुलिस का यह बचाव का हथकंडा चर्चा का विषय बना हुआ है।
शहर की बेशकीमती विवादित जमीन हथियाने को लेकर तीसरे पक्ष के रूप में भाजपा नेत्री पूजा कसौधन सामने आई थी। नगर कोतवाली के शाहगंज पुलिस चौकी में पक्षकारों के बीच वार्ता चल रही थी। इसी बीच चौकी प्रभारी और सिपाहियों की मौजूदगी में बीजेपी कोषाध्यक्ष पूजा कसौंधन ने पुलिस स्टेशन में खड़े युवक को थप्पड़ जड़ दिया। इतना ही नहीं सार्वजनिक रूप से पीड़ित युवक को औकात दिखाने की चेतावनी दरोगा के आगे ही दी गई। थप्पड़ लगाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और पुलिस की किरकिरी हुई। इसके बाद शुरू हुआ भाजपा नेत्री को बचाने का पुलिसिया कारनामा। कोतवाली नगर से जुड़े पुलिस सूत्रों के मुताबिक युवक पर दबाव बनाकर पुलिस अधिकारियों ने मनमाफिक प्रार्थना पत्र लिया गया। दलित की पिटाई के मामले में एससी एसटी एक्ट से राहत देते हुए मामूली धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर लिया गया। ऐसे में सत्ताधारी नेता के आगे खाकी अफसर बैकफुट पर नजर आए हैं। अपराध को कम दर्शाते हुए आनन फानन में मुकदमा दर्ज करना चर्चा का विषय बना हुआ है।

