
कुवैत सिटी। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 5 से 10 जुलाई तक खाड़ी देशों के अपने रणनीतिक और सघन दौरे के तहत कुवैत की महत्वपूर्ण आधिकारिक यात्रा की। इससे पहले उन्होंने बहरीन का सफल दौरा किया था। इस व्यापक पश्चिम एशिया कूटनीतिक मिशन का मुख्य उद्देश्य ऊर्जा सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा, द्विपक्षीय व्यापार और वहां रह रहे विशाल भारतीय समुदाय के कल्याण को सुनिश्चित करना है।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा विदेश मंत्री ने कुवैत के क्राउन प्रिंस शेख सबाह अल-खालिद अल-हमद अल-मुबारक अल-सबाह और प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह से मुलाकात की। विदेश मंत्री ने रक्षा मंत्री शेख अब्दुल्ला अली अब्दुल्ला अल-सलेम अल-सबाह और विदेश मंत्री शेख जर्राह जाबेर अल-अहमद अल-सबाह के साथ बैठकें कीं। इन चर्चाओं से भारत-कुवैत रणनीतिक साझेदारी की समीक्षा करने और आपसी हित के क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर विचार-विमर्श करने का अवसर मिला।

डॉ. जयशंकर ने कुवैत में भारतीय समुदाय के सदस्यों से भी बातचीत की और भारत-कुवैत के बहुआयामी संबंधों को और गहरा करने में उनके निरंतर योगदान की सराहना की।
इससे पहले बहरीन की यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री ने क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री प्रिंस सलमान बिन हमद अल खलीफा की उपस्थिति में किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा से मुलाकात की। उन्होंने उप प्रधानमंत्री शेख खालिद बिन अब्दुल्ला अल खलीफा से भी अलग से मुलाकात की। इन बैठकों के दौरान, विदेश मंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से शुभकामनाएं दीं और बहरीन के साथ लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने के भारत के संकल्प को दोहराया।
मंत्रालय ने एक अन्य बयान में बताया विदेश मंत्री ने बहरीन के अपने समकक्ष डॉ. अब्दुल्लतीफ बिन राशिद अल ज़यानी के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। दोनों मंत्रियों ने आपसी हित के क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों पर विचारों का आदान-प्रदान किया। बयान में कहा गया उन्होंने भारत-बहरीन द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा की और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने के तरीकों पर चर्चा की। विदेश मंत्री ने 2026 से 2027 तक संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के अस्थायी सदस्य के तौर पर बहरीन की भूमिका के लिए उन्हें बधाई दी।
डॉ. जयशंकर का यह 6 दिवसीय दौरा (कतर, बहरीन, कुवैत और आगामी यात्रा के तहत ओमान) तेजी से बदलती वैश्विक और पश्चिम एशियाई राजनीति के बीच नई दिल्ली की सक्रिय कूटनीति का प्रमाण है। कतर में ऊर्जा सुरक्षा, बहरीन में व्यापार व शिपिंग लेन की सुरक्षा, कुवैत में खाद्य सुरक्षा और प्रवासियों का कल्याण, तथा ओमान में व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (सीईपीए) को अंतिम रूप देना इस पूरे दौरे का केंद्रीय स्तंभ है। इस यात्रा ने यह साफ कर दिया है कि खाड़ी क्षेत्र न केवल भारत की ऊर्जा जरूरतों बल्कि आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए भी सर्वोपरि है।
