
लखनऊ। प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न विभागों एवं कर्मचारी वर्गों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की पहल का स्वागत करते हुए उत्तर प्रदेश क्षय रोग वरिष्ठ उपचार पर्यवेक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष करुणा शंकर मिश्र ने संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों और उनके परिवारों की पीड़ा सरकार के समक्ष रखी है। उन्होंने मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री से मार्मिक अपील करते हुए कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में वर्षों से कार्यरत संविदा कर्मचारियों को भी चिकित्सा सुरक्षा और स्थायी भविष्य प्रदान किया जाए।
करुणा शंकर मिश्र ने कहा कि प्रदेश के हजारों संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी पिछले 10 से 25 वर्षों से पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ स्वास्थ्य सेवाओं में कार्य कर रहे हैं। कोरोना महामारी हो, टीबी उन्मूलन अभियान हो अथवा अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य कार्यक्रम, संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों ने हर कठिन परिस्थिति में अपनी जिम्मेदारी निभाई है।
उन्होंने कहा कि संविदा कर्मचारियों के हितों से जुड़े विषयों पर शासन और सरकार की ओर से विभाग को पत्र भेजे गए हैं। विभाग को कर्मचारियों की लंबी सेवा अवधि, अनुभव और वास्तविक परिस्थितियों के आधार पर सकारात्मक प्रस्ताव तैयार कर शासन के समक्ष रखना चाहिए। प्रस्ताव तैयार करने में अनावश्यक देरी से हजारों संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों और उनके परिवारों की उम्मीदें प्रभावित हो रही हैं।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि टीबी, कैंसर, किडनी, लीवर और अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रहे कई संविदा कर्मचारी आर्थिक कठिनाइयों के कारण समय पर समुचित उपचार नहीं करा पाते। कई साथी असमय दुनिया छोड़ चुके हैं और उनके परिवार आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
करुणा शंकर मिश्र ने मार्मिक अपील करते हुए कहा, “माननीय मुख्यमंत्री जी एवं माननीय उपमुख्यमंत्री जी, हम आपसे दया की भीख मांगते हैं। हम विनम्र अनुरोध करते हैं कि हमारे परिवारों की रक्षा करें। हमने अपने जीवन के 10 से 25 वर्ष प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को दिए हैं। हमें समायोजित कर परमानेंट कर दें और हमारे परिवारों को चिकित्सा सुरक्षा प्रदान करें। हमारे परिवारों को असहाय और बेसहारा होने से बचा लें।”
उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा विभिन्न वर्गों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा देने की पहल स्वागत योग्य है। स्वास्थ्य सेवाओं में दिन-रात कार्य करने वाले संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों और उनके परिवारों को भी आयुष्मान अथवा कैशलेस चिकित्सा सुविधा के दायरे में लाया जाना चाहिए।
करुणा शंकर मिश्र ने कहा, “विभाग से हमारा विनम्र अनुरोध है कि वह हमारे भविष्य का निर्णय स्वयं न करे। कर्मचारियों की 10 से 25 वर्षों की निरंतर सेवा, अनुभव और उनके परिवारों की परिस्थितियों को सामने रखते हुए सकारात्मक प्रस्ताव सरकार के समक्ष भेजे। हमें पूरा विश्वास है कि माननीय मुख्यमंत्री जी और माननीय उपमुख्यमंत्री जी हमारी पीड़ा को समझेंगे।”
उन्होंने कहा कि संविदा स्वास्थ्य कर्मचारी सरकार से अपने परिवारों के लिए चिकित्सा सुरक्षा और सम्मानजनक स्थायी भविष्य की अपेक्षा रखते हैं। यदि सरकार लंबे समय से सेवा दे रहे संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों के समायोजन और चिकित्सा सुरक्षा के संबंध में ऐतिहासिक निर्णय लेती है तो प्रदेश का पूरा संविदा स्वास्थ्य परिवार सरकार का हृदय से आभारी रहेगा।
प्रदेश अध्यक्ष ने कहा, “हमें समायोजित कर परमानेंट कर दें। पूरा संविदा स्वास्थ्य परिवार आपकी जय-जयकार करेगा। वर्षों से सरकार की स्वास्थ्य योजनाओं को धरातल तक पहुंचाने वाले संविदा स्वास्थ्य कर्मचारियों और उनके परिवारों को अब सरकार की संवेदनशीलता और संरक्षण की आवश्यकता है।”
