
अमेठी। सोशल मीडिया पर कथित फर्जी फेसबुक आईडी, आपत्तिजनक टिप्पणियों, भ्रामक आरोपों, धमकीपूर्ण गतिविधियों तथा गांव के सामाजिक वातावरण पर पड़ रहे प्रभाव को लेकर सूचना एवं जनसंपर्क विभाग से मान्यता प्राप्त पत्रकार एवं उत्तर प्रदेश जिला मान्यता प्राप्त पत्रकार समिति के प्रदेश संगठन मंत्री गंगेश पाठक ने संबंधित उच्च पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों को विस्तृत प्रार्थना-पत्र भेजकर निष्पक्ष साइबर जांच एवं आवश्यक विधिक कार्रवाई की मांग की है।
प्रार्थना-पत्र में कहा गया है कि प्रकरण से जुड़े स्क्रीनशॉट, लिंक एवं अन्य डिजिटल साक्ष्य पूर्व में देश एवं प्रदेश स्तर के संबंधित पुलिस अधिकारियों, साइबर इकाइयों तथा प्रशासनिक कार्यालयों को ई-मेल के माध्यम से भेजे जा चुके हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार वह लगभग एक वर्ष से संबंधित सोशल मीडिया आईडी की तकनीकी जांच एवं सत्यापन की मांग कर रहे हैं।

पत्र के अनुसार 18 मई की शाम थाना अध्यक्ष, जगदीशपुर से दूरभाष पर वार्ता हुई, किंतु वार्ता के दौरान प्रकरण को सामान्य अथवा चुनावी माहौल से जोड़कर देखे जाने की बात सामने आई, जिससे शिकायतकर्ता ने गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि मामला सामान्य प्रकृति का होता, तो इतने लंबे समय तक तकनीकी जांच की मांग किए जाने का कोई औचित्य नहीं होता।
साथ ही शिकायतकर्ता के अनुसार दूरभाष वार्ता के दौरान थाना अध्यक्ष, जगदीशपुर द्वारा यह भी कहा गया कि प्रकरण में उपलब्ध तथ्यों एवं प्राप्त सूचनाओं के आधार पर साइबर सेल से जांच कराए जाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इससे शिकायतकर्ता ने मामले में निष्पक्ष तकनीकी परीक्षण एवं तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट होने की अपेक्षा जताई है।
प्रार्थना-पत्र में कहा गया है कि प्रारंभ से उनका स्पष्ट अनुरोध केवल इतना रहा है कि “कंगन चोर”, “वीरा पंडित”, “ग्राम पंचायत मंगौली”, “दूध का दूध पानी का पानी” सहित अन्य संबंधित सोशल मीडिया आईडी की निष्पक्ष साइबर जांच कर वास्तविक तथ्य सामने लाए जाएं।
पत्र में विशेष रूप से “कंगन चोर” नामक फेसबुक आईडी के माध्यम से पोस्ट, आरोप एवं टिप्पणियां प्रसारित किए जाने की बात कही गई है। साथ ही यह भी कहा गया है कि समय-समय पर नई पोस्ट साझा की गईं, जिनके लिंक एवं स्क्रीनशॉट संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि उपलब्ध सामग्री का परीक्षण कर वास्तविक स्थिति का आकलन किया जा सके।
प्रार्थना-पत्र में यह भी कहा गया है कि फेसबुक कॉलिंग एवं अन्य डिजिटल माध्यमों के जरिए कथित रूप से दबाव बनाने और धमकीपूर्ण संपर्क जैसी बातें सामने आई हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार इन परिस्थितियों से परिवार में भय, मानसिक तनाव एवं असुरक्षा की स्थिति बनी हुई है। पत्र में आशंका जताई गई है कि ऐसी गतिविधियां भविष्य में किसी अप्रिय स्थिति अथवा कानून-व्यवस्था से जुड़े विषय का कारण बन सकती हैं।
शिकायतकर्ता ने यह भी कहा है कि केवल उनके ही नहीं, बल्कि गांव के अन्य सम्मानित एवं संभ्रांत व्यक्तियों के संबंध में भी आपत्तिजनक सामग्री, विवादित टिप्पणियां एवं आरोप-प्रत्यारोप सोशल मीडिया पर प्रसारित किए जा रहे हैं, जिससे गांव का सामाजिक वातावरण प्रभावित होने तथा आपसी अविश्वास बढ़ने की आशंका है।
गंगेश पाठक ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि उपलब्ध तथ्यों एवं डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर वास्तविक स्थिति स्पष्ट कराना है। उन्होंने संबंधित उच्च अधिकारियों से अनुरोध किया है कि यदि स्थानीय स्तर पर अपेक्षित प्रगति संभव नहीं हो पा रही हो तो किसी सक्षम अधिकारी के माध्यम से निष्पक्ष तकनीकी जांच कराई जाए तथा उपलब्ध पोस्ट, लिंक, कॉल विवरण एवं अन्य अभिलेखों का परीक्षण कर नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

