
फतेहपुर । खागा कोतवाली थाना क्षेत्र में इन दिनों कानून व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय लोगों और गौ तस्कर के बीच चर्चाओं ने तूल पकड़ लिया है। आरोप है कि थाना क्षेत्र में तैनात कस्बा चौकी इंचार्ज व एक सिपाही की कथित जुगलबंदी के सहारे कस्बा चौकी इंचार्ज ने दो पशु तस्कर हरिचन्द्र व अखत्तर को 22-23 की रात लगभग 1:30 बजे नूरी मस्जिद के पास से पकड़ कर अपने आवास कमरे में ले जाकर के बंद कर दिया और अन्य अवैध गतिविधियों की इंट्री का पूरा ‘सिस्टम’ संचालित किया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां सब कुछ कथित तौर पर “लक्ष्मी” के इर्द-गिर्द सजा हुआ दिखाई देता है—जो सिस्टम में शामिल है, उसके लिए रास्ते आसान हैं और जो सवाल उठाता है, उसके लिए मुश्किलें।
एक अंदर, एक बाहर—ऐसे चलता है कथित ‘सिस्टम’?
सूत्रों के अनुसार,एक सिपाही चौंकी के भीतर रहकर कथित तौर पर अंदरूनी रूपरेखा तैयार करता है, *स्थानीय नागरिकों का दावा है कि इसी दोहरी भूमिका के चलते कई मामलों में थाना प्रभारी तक को वास्तविक स्थिति की पूरी जानकारी नहीं हो पाती , या फिर मामला कागज़ों में सामान्य दिखा दिया जाता है। पशु तस्कर और ऑनलाइन सट्टेबाजी में महीनवारी का आरोप ग्रामीणों के अनुसार, पशु तस्कर से जुड़ी पहले एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक की मांग की जाती है,बाद में 50 हजार रुपये पर “सेटिंग” तय होने की चर्चा है।
एक पशु तस्कर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया
“जो तय रकम देता है, उसकी पशु तस्कर बेखौफ चलता है। जो नियम की बात करता है, उसे डराया जाता है।
एक ग्रामीण ने बताया,
“पीड़ित को थकाकर समझा दिया जाता है। आखिर में वह न्याय की उम्मीद छोड़कर लौट जाता है।”
रौब और दबदबा खाकी की छवि पर सवाल
इलाके में यह भी चर्चा है कि कस्बा चौकी इंचार्ज पशु तस्कर में खखरेरू थाना व जाफरगंज थाने पर निलंबन की कार्यवाही हो चुकी है लेकिन दबदबा नशे के साथ कायम रहता है।लोगों का कहना है कि इस रौब के आगे कई लोग आवाज उठाने से कतराते हैं।
सबसे बड़ा सवाल—कौन जिम्मेदार
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सब उच्च अधिकारियों की जानकारी में है?या फिर प्रोटोकॉल और भ्रम के सहारे वास्तविक स्थिति छिपी हुई है?क्या योगी सरकार की सख्त कानून व्यवस्था की नीति इन कथित गतिविधियों तक नहीं पहुंच पा रही?जनता को इंतजार—जांच या चुप्पी?क्षेत्र में जनचर्चा है कि यदि समय रहते निष्पक्ष और पारदर्शी जांच नहीं हुई, तो यह मामला सिर्फ खागा कोतवाली तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी पुलिस व्यवस्था की साख पर असर डालेगा।फिलहाल जनता की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं—क्या संज्ञान लिया जाएगा,या ‘सिस्टम’ यूं ही सवालों से ऊपर चलता रहेगा?
अगली कड़ी में अहम दस्तावेज, तथ्यों और जमीनी साक्ष्यों के सामने आने की संभावना…


