
जिला संवाददाता देवेंद्र तिवारी
उन्नाव। उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में भू-माफियाओं के बढ़ते हौसलों और मछुआरा समुदाय के कथित उत्पीड़न के खिलाफ निषाद पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को पार्टी के सैकड़ों पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट परिसर में जोरदार प्रदर्शन किया और जिला प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि जिले में भू-माफिया सत्ता और रसूख के दम पर गरीब निषादों की जमीनों और तालाबों पर अवैध कब्जे कर रहे हैं, जबकि स्थानीय प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है।
कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन और मुख्यमंत्री को ज्ञापन
निषाद पार्टी के जिला नेतृत्व में जुटे कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नाम संबोधित एक विस्तृत ज्ञापन एसडीएम को सौंपा। ज्ञापन में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि उन्नाव के विभिन्न तहसीलों में मछुआरा समुदाय के लोगों को उनकी पुश्तैनी जमीनों से बेदखल किया जा रहा है। पार्टी नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर भू-माफियाओं के खिलाफ कठोर ‘बुलडोजर’ कार्रवाई नहीं हुई, तो वे लखनऊ में विधानसभा का घेराव करने को बाध्य होंगे।
मछुआरा समुदाय के उत्पीड़न का गंभीर आरोप
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पार्टी पदाधिकारियों ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि निषाद समाज लंबे समय से नदियों के किनारे और तालाबों के पास रहकर अपना जीवन यापन करता आ रहा है। लेकिन पिछले कुछ समय से भू-माफियाओं की नजर इन बेशकीमती जमीनों पर गड़ गई है। आरोप है कि माफिया न केवल जमीनें छीन रहे हैं, बल्कि विरोध करने पर मछुआरा समुदाय के लोगों के साथ मारपीट और फर्जी मुकदमों में फंसाने की धमकी भी दे रहे हैं।
पार्टी ने ज्ञापन में कुछ विशिष्ट गांवों और क्षेत्रों का संदर्भ देते हुए बताया कि वहां के दबंगों ने सिंचाई विभाग और ग्राम समाज की जमीनों पर अवैध निर्माण कर लिया है, जिससे मछुआरा समुदाय के पारंपरिक रास्तों और कार्यस्थलों पर संकट खड़ा हो गया है।
प्रशासन की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
निषाद पार्टी के कार्यकर्ताओं ने स्थानीय पुलिस और राजस्व विभाग की मिलीभगत का भी आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब भी पीड़ित पक्ष तहसील दिवस या थाने में शिकायत लेकर जाता है, तो उसे टालमटोल कर वापस भेज दिया जाता है।
ज्ञापन में मांग की गई है कि:
अवैध कब्जों की पैमाइश: विवादित जमीनों की तत्काल राजस्व टीम गठित कर पैमाइश कराई जाए।
एंटी-भूमाफिया सेल की सक्रियता: जिले में गठित एंटी-भूमाफिया सेल को प्रभावी बनाया जाए और चिन्हित माफियाओं पर गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई हो।
सुरक्षा का आश्वासन: पीड़ित परिवारों को पुलिस सुरक्षा प्रदान की जाए ताकि वे बिना डर के अपनी बात रख सकें।
