
रिमझिम स्टील मिल का ‘जहरीला धुआं’ निगल रहा अकरमपुर की खुशहाली: स्वास्थ्य और खेती तबाह, कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी की चौखट पर पहुंचे ग्रामीण
January 17, 2026
स्वास्थ्य और खेती तबाह, कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी की चौखट पर पहुंचे ग्रामीण
स्वास्थ्य और खेती तबाह, कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी की चौखट पर पहुंचे ग्रामीण
उन्नाव। उत्तर प्रदेश के औद्योगिक मानचित्र पर अपनी पहचान रखने वाले उन्नाव के अकरमपुर औद्योगिक क्षेत्र में इन दिनों विकास की कम और विनाश की आहट ज्यादा सुनाई दे रही है। यहां स्थित रिमझिम स्टील मिल (सरिया मिल) से निकलने वाला प्रदूषण अब स्थानीय निवासियों के लिए ‘धीमा जहर’ साबित हो रहा है। स्थिति इस कदर भयावह हो चुकी है कि अब क्षेत्रवासियों का धैर्य जवाब दे गया है और उन्होंने जिलाधिकारी (डीएम) को प्रार्थना पत्र सौंपकर इस औद्योगिक इकाई के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की मांग की है
चिमनियों से बरस रही ‘काली मौत’
शिकायती पत्र में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि रिमझिम स्टील मिल की चिमनियों से दिन-रात काला धुआं और हानिकारक कण निकल रहे हैं। यह प्रदूषण केवल हवा तक सीमित नहीं है, बल्कि आसपास के घरों, छतों और यहां तक कि पीने के पानी के स्रोतों पर भी कालिख की परत जमा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि मिल प्रबंधन द्वारा प्रदूषण नियंत्रण मानकों (Pollution Control Norms) की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। रात के अंधेरे में अक्सर प्रदूषण नियंत्रण संयंत्रों को बंद कर दिया जाता है, जिससे धुएं का घनत्व और भी अधिक बढ़ जाता है।
स्वास्थ्य पर मंडराता संकट
अकरमपुर और आसपास के गांवों में बीमारियों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो स्टील मिलों से निकलने वाले महीन कण (PM 2.5 और PM 10) फेफड़ों में गहराई तक समा जाते हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, बच्चों और बुजुर्गों में अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और सांस लेने में तकलीफ की समस्याएं आम हो गई हैं। इसके अलावा, आंखों में जलन और त्वचा संबंधी रोगों के मरीजों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है। शिकायतकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते मिल पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह क्षेत्र किसी बड़ी स्वास्थ्य त्रासदी का केंद्र बन सकता है।
खेतों में पसरा सन्नाटा: कृषि और पर्यावरण का नुकसान
रिमझिम स्टील मिल का दुष्प्रभाव केवल इंसानों तक सीमित नहीं है। मिल से निकलने वाले रासायनिक कचरे और राख ने आसपास की उपजाऊ भूमि को बंजर बनाना शुरू कर दिया है। किसानों का कहना है कि फसलों की पत्तियों पर धुएं की परत जम जाती है, जिससे प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) की प्रक्रिया बाधित होती है और पैदावार आधी रह गई है। भूजल का स्तर भी प्रदूषित हो रहा है, जिससे खेती के साथ-साथ मवेशियों के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर पड़ रहा है।
प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल
हैरानी की बात यह है कि औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की नजरें इस मिल पर इनायत बनी हुई हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में कई बार मौखिक शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अब जिलाधिकारी को सौंपे गए पत्र में साफ कहा गया है कि यदि प्रशासन ने मिल की चिमनियों से निकलते इस जहर को नहीं रोका, तो क्षेत्रवासी उग्र आंदोलन के लिए विवश होंगे।


