
जिला संवाददाता देवेंद्र तिवारी
उन्नाव: उत्तर प्रदेश के उन्नाव रेलवे स्टेशन के पास शनिवार को एक भीषण रेल हादसा होते-होते रह गया। लखनऊ-कानपुर रेलखंड पर स्थित लोक नगर क्रासिंग के समीप गोरखपुर से त्रिवेंद्रम जा रही एक्सप्रेस ट्रेन के इंजन के सामने अचानक एक सांड आ गया। चालक की त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और सतर्कता के कारण एक बड़ा हादसा टल गया, जिससे ट्रेन में सवार सैकड़ों यात्रियों की जान सुरक्षित रही।
अचानक ट्रैक पर आया सांड, चालक ने दिखाए ‘रिफ्लेक्स’
मिली जानकारी के अनुसार, गोरखपुर-त्रिवेंद्रम एक्सप्रेस अपनी निर्धारित गति से कानपुर की ओर बढ़ रही थी। जैसे ही ट्रेन लोक नगर क्रासिंग के पास पहुँची, एक आवारा सांड अचानक दौड़ता हुआ ट्रैक पर आ गया। ट्रेन की रफ्तार अधिक होने के कारण सांड इंजन से टकरा गया और उसके नीचे बुरी तरह फंस गया।

स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लोको पायलट (चालक) ने बिना एक पल गंवाए ‘इमरजेंसी ब्रेक’ लगा दिए। भारी-भरकम ट्रेन तेज झटके के साथ रुकी। चश्मदीदों का कहना है कि अगर चालक कुछ सेकंड की भी देरी करता, तो सांड के इंजन के पहियों के नीचे आने से ट्रेन के पटरी से उतरने (डिरेलमेंट) का गंभीर खतरा पैदा हो सकता था।
यात्रियों में मचा हड़कंप, 20 मिनट तक थमी रही रफ्तार
ट्रेन में अचानक लगे तेज झटके के कारण यात्रियों के बीच अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सो रहे यात्री अपनी सीटों से गिरते-गिरते बचे, वहीं कई लोग अनहोनी की आशंका में घबराकर चिल्लाने लगे। जैसे ही ट्रेन रुकी, बड़ी संख्या में यात्री डिब्बों से बाहर निकल आए और इंजन की ओर दौड़ पड़े।
इंजन के निचले हिस्से में सांड का शव फंसा हुआ था। घटना की सूचना मिलते ही रेलवे के तकनीकी कर्मचारी और सुरक्षा बल मौके पर पहुँचे। लगभग 20 मिनट की कड़ी मशक्कत और तकनीकी जांच के बाद सांड के अवशेषों को इंजन से बाहर निकाला गया। इसके बाद रेल पटरी और इंजन की बारीकी से जांच की गई ताकि आगे के सफर में कोई तकनीकी बाधा न आए।
रेलवे प्रशासन की सतर्कता
हादसे की सूचना मिलते ही कंट्रोल रूम ने एहतियातन उस रूट पर आने-जाने वाली अन्य ट्रेनों की गति को भी धीमा करने के निर्देश दिए। रेलवे अधिकारियों ने मौके का मुआयना किया। प्रारंभिक जांच में यह बात स्पष्ट हुई कि इंजन को मामूली खरोंचें आई हैं, लेकिन समय रहते ब्रेक लगने से इंजन के इंटरनल मैकेनिज्म को बड़ा नुकसान नहीं पहुँचा।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि “आवारा पशुओं का ट्रैक पर आना एक गंभीर समस्या बनी हुई है। इस मामले में चालक की तत्परता काबिले तारीफ है, जिन्होंने न केवल रेलवे की संपत्ति को बचाया बल्कि सैकड़ों परिवारों को उजड़ने से रोक लिया।”



