
उन्नाव।
नवाबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में ऑटोक्लेव मशीन को लेकर सामने आए गंभीर मामले ने ब्लॉक प्रशासन और जिला स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
परिवार कल्याण महानिदेशक डॉ. पवन कुमार के औचक निरीक्षण में उजागर हुई लापरवाही के 48 घंटे बीत जाने के बावजूद न तो कोई स्पष्ट कार्रवाई हुई, न ही प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक जवाब सामने आया।
यह चुप्पी साफ इशारा कर रही है कि मामले को जांच के बजाय दबाने की कोशिश की जा रही है।
ब्लॉक प्रशासन की भूमिका संदेह के घेरे में
सूत्रों के मुताबिक, निरीक्षण के बाद भी ब्लॉक स्तर से न तो स्थिति की समीक्षा की गई और न ही जिम्मेदार अधिकारियों को तलब किया गया।
ब्लॉक स्वास्थ्य प्रशासन की निष्क्रियता यह दर्शाती है कि नीचे से ऊपर तक एक ही लाइन पर काम हो रहा है— “मामला ठंडा करो।”
मेंटेनेंस संस्था की रिपोर्ट बनी लीपापोती का हथियार
ऑटोक्लेव मशीन की देखरेख करने वाली अधिकृत मेंटेनेंस संस्था ने अपनी रिपोर्ट में मशीनों को ‘कार्यशील’ बता दिया।
लेकिन सवाल है कि
जो मशीन निरीक्षण के समय खराब पाई गई, वह 24 घंटे में सही कैसे हो गई? क्या यह रिपोर्ट जमीनी हकीकत पर आधारित थी या प्रशासनिक दबाव में तैयार की गई?
इस रिपोर्ट ने ब्लॉक और स्वास्थ्य प्रशासन को कार्रवाई से बचने का बहाना दे दिया।
लेबर रूम की ऑटोक्लेव मशीन अब भी गायब
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि
निरीक्षण के दौरान जिस ऑटोक्लेव मशीन को लेबर रूम से हटाकर मरम्मत की बात कही गई थी—
वह अब तक लेबर रूम में वापस नहीं लगाई गई है।
सूत्र बताते हैं कि मशीन अब भी सराय जोगा उपकेंद्र में पड़ी है।
यानी समस्या सुलझाने के बजाय मशीन को इधर-उधर कर भ्रम पैदा किया गया।
प्रशासन की लापरवाही से गर्भवती महिलाओं की जान खतरे में
ऑटोक्लेव मशीन के बिना लेबर रूम में उपकरणों का स्टरलाइजेशन संभव नहीं।
इसके बावजूद—
प्रसव सेवाएं जारी हैं
कोई वैकल्पिक व्यवस्था सार्वजनिक नहीं
मरीजों को जोखिम की जानकारी तक नहीं
यह स्थिति सीधे तौर पर ब्लॉक प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की घोर लापरवाही को उजागर करती है, जहां महिलाओं और नवजातों की सुरक्षा से ज्यादा फाइलें बचाना प्राथमिकता बन गई है
सीएचसी अधीक्षक की चुप्पी भी सवालों के घेरे में
मामले में सीएचसी अधीक्षक डॉ. पंकज वर्मा से संपर्क की कोशिश की गई, लेकिन उनकी ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।
उनकी चुप्पी यह बताने के लिए काफी है कि—
प्रशासनिक स्तर पर जवाब देने से बचा जा रहा है
मामले को समय के साथ दबाने की रणनीति अपनाई गई है
अब सीधे प्रशासन से सवाल
खराब ऑटोक्लेव मशीन आखिर कहां है?
ब्लॉक स्तर पर अब तक जांच क्यों नहीं बैठाई गई?
मेंटेनेंस रिपोर्ट किसके निर्देश पर बनाई गई?
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी
नवाबगंज सीएचसी का यह मामला अब केवल मशीन खराब होने का नहीं रहा,
बल्कि यह ब्लॉक प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और निगरानी तंत्र की विफलता का प्रतीक बन चुका है।
प्रशासन कार्रवाई कर जनता का भरोसा बचाता है या यह मामला भी बाकी फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।

