जिला संवाददाता देवेंद्र तिवारी
उन्नाव। विकासखंड की 13 ग्राम पंचायतें इन दिनों बिना सचिव के चल रही हैं – या कहें चल ही नहीं रही हैं। 23 मई से अब तक इन ग्राम पंचायतों में सचिवों की तैनाती नहीं हो पाई है, जिससे गांवों के बैंक खाते बंद पड़े हैं और विकास कार्य ठप हो गए हैं। इससे ग्रामीणों को जरूरी कामों के लिए ब्लॉक के चक्कर काटने पड़ रहे हैं, लेकिन समाधान की कोई उम्मीद नहीं दिख रही।
गांवों में व्यवस्था ठप, लोग बेहाल
पुरथ्यावां, बहादुरपुर खंजडी, लोधई, लहरु, ताल्ही, गोहली, शीशी, सीमऊ, खड़वल, अल्दौ, बछौली, हसनपुर पश्चिम और बावबयारी जैसे गांवों में हालात बिगड़ चुके हैं। ग्राम प्रधानों का कहना है कि *सचिवों की गैरहाजिरी के चलते पंचायत खातों का संचालन बंद है जिससे न तो कोई भुगतान हो पा रहा है और न ही विकास से जुड़ी कोई योजना आगे बढ़ रही है।
बच्चे बिना जन्म प्रमाण पत्र, बुजुर्ग बिना पेंशन
ग्राम पंचायत सचिवों के बिना *निवास प्रमाणपत्र, जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र, परिवार रजिस्टर की नकल और वृद्धावस्था पेंशन जैसी बुनियादी सुविधाएं ठप पड़ी हैं। ग्रामीण ब्लॉक दफ्तर के चक्कर काटकर थक चुके हैं लेकिन कोई समाधान नहीं निकल रहा।
गोशालाओं में चारा नहीं, केयर टेकर भूखे!
गोशालाओं के फंड न निकल पाने से गोवंशों के लिए चारा-पानी का संकट गहरा गया है। केयर टेकरों को महीनों से मानदेय नहीं मिला है जिससे पशुओं की देखरेख पर भी असर पड़ रहा है।
प्रशासन का पल्ला झाड़ना जारी
बीडीओ दीपशिखा वर्मा का कहना है कि दो सचिवों के निलंबन के कारण तीन क्लस्टरों में तैनाती नहीं हो पाई है। जिलास्तरीय आवंटन लंबित है और विभागीय अधिकारियों को पत्र भेजा जा चुका है। लेकिन सवाल ये है कि पत्राचार के नाम पर कब तक ग्रामीणों की ज़िंदगी लटकी रहेगी?
प्रशासनिक अनदेखी और लापरवाही ने ग्रामीणों को ठगा सा महसूस कराया है पंचायतों में सचिवों की बहाली कब होगी – इसका जवाब किसी के पास नहीं।
क्या विकास का चक्का सिर्फ कागज़ों पर चलता रहेगा?
क्या सचिवविहीन पंचायतें सिर्फ आंकड़ों में जिंदा रहेंगी?
फिलहाल, ग्रामीणों के हिस्से में सिर्फ इंतज़ार और निराशा है।

