
अमेठी की साइबर क्राइम पुलिस ने एक अन्तर्राज्यीय संगठित गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए सोशल मीडिया के माध्यम से करोड़ों की साइबर ठगी करने वाले मास्टरमाइंड समेत तीन अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक अपर्णा रजत कौशिक के निर्देशन, अपर पुलिस अधीक्षक शैलेन्द्र कुमार सिंह के पर्यवेक्षण और क्षेत्राधिकारी गौरीगंज अखिलेश वर्मा के नेतृत्व में साइबर थाना अमेठी व एसटीएफ लखनऊ की संयुक्त टीम द्वारा की गई।
घटना अगस्त 2024 की है जब ग्राम त्रिशुण्डी थाना रामगंज जनपद अमेठी निवासी आशीष विक्रम सिंह के फेसबुक अकाउंट पर एक संदिग्ध लिंक आया, जिसे क्लिक करते ही उनका संपर्क व्हाट्सएप और फिर टेलीग्राम के जरिए एक ठग गिरोह से हो गया। आरोपियों ने शुरुआत में उन्हें टास्क पूरा करने पर 10,000 रुपये का लालच देकर और भी टास्क कराए। आगे चलकर जब वादी का बैलेंस माइनस दिखाया गया, तो उनसे और अधिक पैसे जमा कराए गए और इस प्रक्रिया में कुल 15,84,100 रुपये की ठगी कर ली गई।
वादी की तहरीर पर साइबर क्राइम थाने में मु0अ0सं0 13/24 धारा 316(2), 319(2), 318(4), 338, 336(3), 340(2), 61(2) बीएनएस व 66D सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन अधिनियम 2008 के तहत अभियोग पंजीकृत किया गया। इसके बाद एसटीएफ साइबर सेल लखनऊ से तकनीकी सहयोग प्राप्त कर प्रभारी निरीक्षक राजेश कुमार और आरक्षी बलबीर कश्यप की टीम ने गिरोह के मास्टरमाइंड शिवांश मिश्रा पुत्र शैलेन्द्र प्रसाद मिश्रा उम्र 22 वर्ष निवासी शौकी मोहल्ला गणेशगंज थाना सहडोल, रवि सिंह पुत्र विनोद सिंह उम्र 23 वर्ष निवासी गांधी स्टेडियम के पीछे, थाना सहडोल और उमाशंकर तिवारी पुत्र बालमुंकुद तिवारी उम्र 43 वर्ष निवासी नई बस्ती बाग मुगलिया थाना बागसेवनियाँ भोपाल को मध्यप्रदेश से गिरफ्तार कर लिया।
पूछताछ में अभियुक्तों ने बताया कि शिवांश मिश्रा और रवि सिंह भाभा यूनिवर्सिटी भोपाल से बीफार्मा की पढ़ाई कर रहे हैं। 2023 में IGT सोल्यूशन कॉल सेंटर भोपाल में नौकरी के दौरान इनकी मुलाकात जुबेर खान, सैफ खान, और फिर अनिल व अमित नायक से हुई। ये लोग फर्जी दस्तावेजों से बैंक खाते खुलवाते और उनकी पूरी किट – जिसमें ATM कार्ड, पासबुक, चेकबुक, रजिस्टर्ड सिम, नेट बैंकिंग ID व पासवर्ड आदि होता – 15,000 रुपये प्रति खाता के हिसाब से अनिल और अमित नायक को देते थे। इन खातों में जब साइबर ठगी का पैसा आता, तो अभियुक्त उसे ATM या चेक के माध्यम से निकालकर नायक भाइयों को सौंपते और बदले में कमीशन प्राप्त करते। अब तक इन्होंने लगभग 50 बैंक खाते इस गिरोह को उपलब्ध कराए हैं।
पुलिस ने इनके पास से 03 मोबाइल फोन, 16 डेबिट कार्ड, 15 चेकबुक, 09 पासबुक, 359 साइबर ठगी से संबंधित व्हाट्सएप चैटिंग के स्क्रीनशॉट, 01 पैन कार्ड, 01 ड्राइविंग लाइसेंस और 01 आईडी कार्ड बरामद किया है। गिरफ्तार अभियुक्तों से पूछताछ के आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है।
पुलिस की जनता से अपील है कि किसी भी अंजान लिंक, कॉल, वीडियो कॉल या संदिग्ध टास्क वाले मैसेज पर क्लिक न करें। किसी को भी अपना आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाता विवरण, OTP, ATM पिन, या नेटबैंकिंग पासवर्ड साझा न करें। जागरूकता ही सुरक्षा है।
यदि कोई साइबर अपराध घटित हो तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
जागरूक रहें, सतर्क रहें — यही साइबर अपराध से आपकी सुरक्षा है।

