
फतेहपुर।।फतेहपुर के आबकारी विभाग से सामने आ रही एक चर्चित स्थिति ने प्रशासनिक व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर शासन स्तर पर सख्त प्रशासन और जवाबदेही की बात की जाती है, वहीं दूसरी ओर विभाग के भीतर ट्रांसफर आदेशों के पालन को लेकर ढिलाई की चर्चा तेज होती दिखाई दे रही है।सूत्रों के अनुसार, विभाग में तैनात एक बाबू का स्थानांतरण प्रयागराज के लिए पूर्व में ही किया जा चुका है। सामान्य प्रक्रिया के तहत ऐसे आदेश के बाद संबंधित कर्मचारी को तत्काल नई तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करना होता है। लेकिन चर्चा है कि संबंधित बाबू अब भी फतेहपुर में अपनी पुरानी जिम्मेदारी संभाले हुए हैं।इस स्थिति ने कई तरह के सवाल खड़े कर दिए हैं क्या आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने वाली प्रणाली कमजोर पड़ रही है, या फिर किसी स्तर पर प्रभाव और संरक्षण की भूमिका सामने आ रही है?विभागीय सूत्रों के हवाले से यह भी कहा जा रहा है कि संबंधित कर्मचारी का विभाग में प्रभाव काफी मजबूत माना जाता है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चर्चा यह है कि कई फाइलों की प्रक्रिया और निर्णयों की गति इस प्रभाव से प्रभावित होती रही है।कुछ लोगों द्वारा यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि कामकाज को लेकर अनौपचारिक प्रक्रियाएं और देरी की शिकायतें सामने आती रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है, इसलिए इन पर अंतिम रूप से कुछ कहना जल्दबाजी होगी।सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि ट्रांसफर आदेश जारी हो चुका है, तो उसका पालन अब तक क्यों नहीं हुआ? क्या यह प्रशासनिक लापरवाही है, या फिर किसी विशेष व्यक्ति को अप्रत्यक्ष संरक्षण प्राप्त है अब निगाहें प्रशासन और संबंधित अधिकारियों पर टिकी हैं कि क्या इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी, या फिर यह मामला भी अन्य कई मामलों की तरह समय के साथ ठंडे बस्ते में चला जाएगा।
क्या ट्रांसफर आदेश केवल कागजी प्रक्रिया बनकर रह गए हैंक्या विभागीय अनुशासन सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे क्या संबंधित मामले की निष्पक्ष जांच होगी



