
संवाददाता सचिन पाण्डेय
उन्नाव: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से प्रशासनिक लापरवाही और उस पर जिलाधिकारी के कड़े रुख का एक बड़ा मामला सामने आया है। एक बुजुर्ग महिला, जो सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटकर खुद के जिंदा होने का सबूत दे रही थी, उसे न्याय दिलाते हुए जिलाधिकारी (DM) गौरांग राठी ने बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी ने महिला को कागजों में मृत घोषित कर उसकी पेंशन रोकने के दोषी तत्कालीन पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
क्या है पूरा मामला?
मामला उन्नाव के हिलौली ब्लॉक का है। यहाँ की निवासी एक वृद्ध महिला पिछले काफी समय से अपनी वृद्धावस्था पेंशन न आने के कारण परेशान थी। जब महिला ने इसकी छानबीन की, तो वह यह जानकर दंग रह गई कि सरकारी रिकॉर्ड में उसे ‘मृत’ घोषित कर दिया गया है। कागजों पर मौत दर्ज होने के कारण उसकी सामाजिक सुरक्षा पेंशन को रोक दिया गया था।
पीड़ित महिला ने हार नहीं मानी और अपनी ‘जिंदा’ मौजूदगी का प्रमाण लेकर अधिकारियों की चौखट पर दस्तक दी। मामला जब जिलाधिकारी गौरांग राठी के संज्ञान में आया, तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश दिए।
तत्कालीन सचिव पर गिरी गाज
जांच में पाया गया कि हिलौली ब्लॉक के तत्कालीन पंचायत सचिव रंजीत कुमार ने अपनी रिपोर्ट में लापरवाही बरतते हुए जीवित महिला को मृत दिखा दिया था। इस गंभीर चूक के कारण महिला न केवल आर्थिक तंगी का शिकार हुई, बल्कि उसे मानसिक प्रताड़ना भी झेलनी पड़ी।
DM गौरांग राठी की सख्त कार्रवाई
निलंबन: जिलाधिकारी ने पंचायत सचिव रंजीत कुमार की लापरवाही को अक्षम्य मानते हुए उन्हें तुरंत निलंबित कर दिया है।
पेंशन बहाली: प्रशासन ने आदेश दिया है कि आगामी 15 दिनों के भीतर पीड़ित महिला की रुकी हुई पेंशन की पूरी प्रक्रिया को बहाल किया जाए और बकाया राशि का भुगतान सुनिश्चित किया जाए।
जवाबदेही: संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि इस तरह की त्रुटियां दोबारा न हों, वरना और भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।



