
जिला संवाददाता देवेंद्र तिवारी
उन्नाव। क्रांति की उर्वर भूमि उन्नाव में आज भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अमर पुरोधा शहीद-ए-आजम चंद्रशेखर आजाद की 120वीं जयंती पूरे गौरव और उल्लास के साथ मनाई गई। जनपद के अचलगंज थाना क्षेत्र स्थित उनके पैतृक गांव बदरका में आयोजित भव्य समारोह में उत्तर प्रदेश विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। उन्होंने शहीद आजाद की भव्य प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें कोटि-कोटि नमन किया और राष्ट्र के प्रति उनके सर्वोच्च बलिदान को याद किया।
“अंग्रेजी हुकूमत के लिए खौफ का दूसरा नाम थे आजाद”
समारोह को संबोधित करते हुए विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के ऐसे जाज्वल्यमान नक्षत्र थे, जिन्होंने अपनी वीरता और अदम्य साहस से ब्रिटिश साम्राज्य की चूलें हिला दी थीं। उन्होंने कहा, “आजाद एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार थे। उन्होंने जीते जी कभी भी अंग्रेजी हुकूमत की बेड़ियों को स्वीकार नहीं किया और अपने संकल्प ‘आजाद ही रहे हैं, आजाद ही रहेंगे’ को अंत तक निभाया।”
महाना ने आगे कहा कि आज हम जिस स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं, वह आजाद जैसे महान क्रांतिकारियों के लहू से सींचा गया है। उनका संपूर्ण जीवन त्याग, तपस्या और मातृभूमि के प्रति अटूट भक्ति का अनुपम उदाहरण है। उन्होंने विशेष रूप से युवा पीढ़ी का आह्वान करते हुए कहा कि आज के युवाओं को आजाद के चरित्र से साहस और राष्ट्रप्रेम की सीख लेनी चाहिए ताकि एक सशक्त और समर्थ भारत का निर्माण हो सके।
राज्यसभा सांसद ने भी किया नमन
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद राज्यसभा सांसद अशोक बाजपेई ने भी शहीद चंद्रशेखर आजाद को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि उन्नाव की मिट्टी सौभाग्यशाली है जिसने ऐसे वीर सपूत को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि काकोरी कांड से लेकर अल्फ्रेड पार्क के अंतिम संघर्ष तक, आजाद का हर कदम देश की आजादी के लिए समर्पित था। ऐसे क्रांतिकारियों की बदौलत ही भारत गुलामी की दासता से मुक्त हो सका है।
बदरका में तीन दिवसीय महोत्सव की धूम
आयोजन समिति के सदस्यों ने जानकारी दी कि बदरका गांव में शहीद चंद्रशेखर आजाद की जयंती के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय भव्य समारोह का आयोजन किया गया है। इस दौरान गांव में मेले जैसा माहौल है। महोत्सव के तहत विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम, देशभक्ति के गीत, विचार गोष्ठियां और स्कूली बच्चों के लिए प्रतियोगिताएं आयोजित की जा रही हैं। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास और शहीदों की गाथाओं से परिचित कराना है।
