जिला संवाददाता देवेंद्र तिवारी
उन्नाव।
एक तरफ सरकार गरीबों को मुफ्त इलाज और दवा देने की बड़ी-बड़ी घोषणाएं करती है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं दवाओं को जिला अस्पतालों के आंगन में जलाकर राख किया जा रहा है। शनिवार को सफीपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) परिसर में चार बोरी सरकारी दवाओं और सिरप को दिनदहाड़े जला दिया गया , जिससे क्षेत्र में हड़कंप मच गया।
लोगों ने देखा धुआं, खुला ‘दवा जलाने’ का राज
सुबह करीब 10 बजे CHC परिसर से उठते तेज धुएं को देखकर लोग मौके पर पहुंचे, तो वहां का दृश्य चौंकाने वाला था—
वहीं, चार बोरी दवाएं जल रही थीं। जल रही गोलियों और सिरप की बोतलों के ढेर में से कई पैकेट अधजले हालत में मिले।
इनमें विटामिन D की दवा, बुखार और पेट संक्रमण के सिरप, अल्प्राजोलम टैबलेट, और परिवार नियोजन की गोलियां शामिल थीं। सबसे चौंकाने वाली बात यह कि कई दवाओं की एक्सपायरी जुलाई 2026 दर्ज थी — यानी, पूरी तरह उपयोगी दवाएं!
हर दिन 300 मरीज, फिर भी दवाएं राख क्यों?
सवाल बड़ा है — जब सफीपुर CHC में रोजाना 200 से 300 मरीज इलाज के लिए आते हैं, तो ये दवाएं मरीजों तक क्यों नहीं पहुंचीं?
सरकारी वेयरहाउस से मिलने वाली ये दवाएं गरीब और ग्रामीण मरीजों के लिए होती हैं। लेकिन ज़मीनी हकीकत यह है कि ये जीवनरक्षक दवाएं इलाज से पहले ही आग में झोंक दी गईं।प्रभारी डॉक्टर का बयान “जानकारी कर रहे हैं”
सीएचसी प्रभारी डॉ. राजेश कुमार वर्मा ने कहा, “घटना की जानकारी कराई जा रही है, पता लगाया जाएगा कि दवाएं किसने और क्यों जलाईं।”
लेकिन सवाल यह है —
क्या यह सिर्फ “जानकारी कराने” लायक मामला है, या फिर सरकारी संसाधनों की खुली बर्बादी और जवाबदेही की मांग करने वाला अपराध?
क्यों ज़रूरी है जांच
यह सिर्फ कुछ बोरियों की दवा नहीं, बल्कि जनता के हक़ और सरकार की मंशा की राख बन चुकी कहानी है।
सवाल उठता है —
क्या इन दवाओं को छिपाने के लिए जलाया गया, या किसी गड़बड़ी को मिटाने के लिए?
सफीपुर सीएचसी में दवा जलाने का यह मामला अब पूरे जिले के स्वास्थ्य विभाग पर कटघरे में खड़ा है।
सरकारी योजना थी — “हर गरीब तक दवा पहुंचे”
लेकिन उन्नाव में सच यह दिखा — हर गरीब की दवा जला दी गई।”

