
संवाददाता इरफान कुरैशी,
लखनऊ। तहज़ीब और अदब के शहर लखनऊ में पैगंबर हज़रत मोहम्मद मुस्तफ़ा के जन्मदिन के मौके पर एक शानदार जुलूस निकाला गया। यह जुलूस शहर की पुरानी तहज़ीब और भाईचारे की मिसाल पेश कर रहा था। मदहे सहाबा के इस जुलूस का आग़ाज़ अमीनाबाद के झंडे वाली पार्क से हुआ और ईदगाह में जाकर संपन्न हुआ।

इस जुलूस में धार्मिक एकता की एक खूबसूरत तस्वीर देखने को मिली। जुलूस के रास्ते में कई जगहों पर खाने-पीने और तबर्रुक के लिए सबील लगाए गए थे। इनमें से एक सबील यहियागंज व्यापार मंडल ने लगाई थी। इस सबील की सबसे खास बात यह थी कि इसे लगाने वाले हिंदू और मुस्लिम, दोनों समुदायों के लोग थे। यह एक पुरानी परंपरा है जो कई सालों से चली आ रही है।
इस सबील की जिम्मेदारी अमरनाथ मिश्रा और बाबू भाई की देखरेख में हुआ। उन्होंने बताया कि यह सबकी साझी जिम्मेदारी है। इसमें मोहम्मद अरशद, मोहम्मद रिजवान, आमिर अहमद, चांद मियां, महफूज़, ओमान अहमद, रजि खान, मोहम्मद कामरान, मोहम्मद मेराज और शारिक अली और अन्य लोग भी शामिल थे। इस सबील पर सिर्फ बिस्किट और चिप्स ही नहीं, बल्कि बड़ों के लिए पकवान और बच्चों के लिए खास तोहफे भी बांटे जा रहे थे।
यह सबील सिर्फ खाने-पीने की चीज़ें नहीं बांट रही थी, बल्कि पैगंबर मोहम्मद साहब के भाईचारे, इंसानियत और प्रेम के संदेश को भी फैला रही थी। यह दृश्य दिखाता है कि लखनऊ की तहज़ीब आज भी ज़िंदा है, जहाँ लोग सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।

