लखनऊ।।
नेपाल के नए सीमा नियमों से भारत–नेपाल सीमा पर व्यापार ठप, हजारों छोटे व्यापारियों की रोजी–रोटी पर संकट
संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल की राष्ट्रीय अध्यक्ष गीता गुप्ता ने पीएम और विदेश मंत्री को लिखा पत्र, तत्काल कूटनीतिक हस्तक्षेप की मांग
नेपाल सरकार द्वारा हाल ही में लागू किए गए नए सीमा नियमों ने भारत-नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के सीमावर्ती जिलों में व्यापारिक गतिविधियों को बुरी तरह प्रभावित किया है। संयुक्त उद्योग व्यापार मंडल की राष्ट्रीय अध्यक्ष गीता गुप्ता ने इस मुद्दे पर गहरी चिंता जताते हुए भारत सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है।

रोजमर्रा की वस्तुओं का व्यापार सबसे ज्यादा प्रभावित
गीता गुप्ता ने प्रेस वार्ता में कहा, “नेपाल हमारा सदियों पुराना मित्र राष्ट्र है। दोनों देशों के बीच रोटी–बेटी का संबंध है। सीमावर्ती क्षेत्रों में वर्षों से दाल, चावल, आटा, गेहूं, चना, तेल, घी, नमक, चीनी, मसाले, चाय पत्ती, बिस्किट, साबुन, सर्फ, नील, निरमा, सफाई सामग्री, टूथपेस्ट, टूथब्रश, कंघी, दवाइयाँ, पट्टी–दवा, पूजा सामग्री, अगरबत्ती, माचिस, मोमबत्ती, स्टेशनरी, कॉपी–किताब, पेन–पेंसिल, गिफ्ट आइटम, बच्चों के खिलौने, प्लास्टिक का सामान, रेडीमेड कपड़े, चप्पल–जूते, साइकिल एवं बाइक के स्पेयर पार्ट्स, टॉर्च, बैटरी, बल्ब जैसी दैनिक उपभोग की वस्तुओं का सहज और पारंपरिक आदान–प्रदान होता रहा है। लेकिन अब स्मगलिंग के नाम पर छोटे एवं लघु व्यापारियों को अनावश्यक रूप से परेशान किया जा रहा है।“
हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट
उन्होंने बताया कि नए नियमों का सबसे ज्यादा असर उत्तर प्रदेश के बहराइच, लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, श्रावस्ती, बलरामपुर, सिद्धार्थनगर, महाराजगंज, बिहार के सीतामढ़ी, मधुबनी, अररिया, किशनगंज और उत्तराखंड के चंपावत, उधमसिंह नगर जिलों में देखने को मिल रहा है। इन क्षेत्रों में दैनिक उपयोग की वस्तुओं से जुड़े लगभग 50 हजार से अधिक छोटे व्यापारी सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं।
“एक तरफ भारत सरकार ‘वोकल फॉर लोकल’ और छोटे व्यापारियों को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं सीमा पर इन्हीं व्यापारियों को स्मगलर की नजर से देखा जा रहा है। इससे व्यापारियों में भय और असमंजस का माहौल है। कई स्थानों से व्यापारियों को अनावश्यक रूप से प्रताड़ित करने और माल जब्त करने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं,” गीता गुप्ता ने कहा।
स्थानीय नागरिक भी परेशान
सीमा नियमों की सख्ती का असर केवल व्यापारियों पर ही नहीं, बल्कि आम नागरिकों पर भी पड़ रहा है। सीमावर्ती गांवों में रहने वाले लोग रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दोनों देशों में आते-जाते रहे हैं। अब जांच के नाम पर घंटों रोकना, सामान की मात्रा पर सवाल उठाना जैसी घटनाएं आम हो गई हैं। इससे सामाजिक संबंधों पर भी असर पड़ रहा है।
सरकार से 3 सूत्रीय मांग
गीता गुप्ता ने केंद्र सरकार से तीन प्रमुख मांगें रखी हैं:
- तत्काल कूटनीतिक पहल: नेपाल सरकार के साथ उच्चस्तरीय वार्ता कर नए नियमों में छोटे व्यापारियों के लिए छूट सुनिश्चित की जाए।
- सीमा पर स्पष्ट SOP: दैनिक उपयोग की वस्तुओं की सूची और मात्रा तय कर स्थानीय प्रशासन को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी हों, ताकि मनमानी रोकी जा सके।
- व्यापारी हेल्पलाइन: सीमावर्ती जिलों में व्यापारियों की शिकायतों के निस्तारण के लिए 24×7 हेल्पलाइन शुरू की जाए।
पीएम, विदेश मंत्री को लिखा पत्र
इस गंभीर मुद्दे को लेकर गीता गुप्ता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर विस्तृत पत्र भी सौंपा है। पत्र में उन्होंने कहा है कि भारत-नेपाल की मित्रता का उदाहरण पूरे विश्व में दिया जाता है। छोटे व्यापारियों की समस्याओं का समाधान कर इस मित्रता को और मजबूत किया जाए।
“हमें विश्वास है कि सरकार की सकारात्मक एवं संवेदनशील पहल से न केवल वर्तमान समस्याओं का समाधान होगा, बल्कि भारत-नेपाल के पारंपरिक संबंध और अधिक मजबूत होंगे। दोनों देशों की मित्रता का बखान सदैव होता रहेगा,” गीता गुप्ता ने कहा।
बॉक्स: सबसे ज्यादा प्रभावित वस्तुएं
खाद्यान्न: दाल, चावल, आटा, गेहूं, चना, तेल, घी, नमक, चीनी, मसाले, चाय पत्ती, बिस्किट
घरेलू उपयोग: साबुन, सर्फ, नील, निरमा, सफाई सामग्री, टूथपेस्ट, टूथब्रश, माचिस, मोमबत्ती, टॉर्च, बैटरी
स्वास्थ्य एवं पूजा: दवाइयाँ, पट्टी-दवा, अगरबत्ती, धूप
शिक्षा एवं अन्य: स्टेशनरी, कॉपी-किताब, बच्चों के खिलौने, रेडीमेड कपड़े, चप्पल-जूते, साइकिल-बाइक पार्ट्स

