
लखनऊ। पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन द्वारा निजीकरण की दिशा में मनमाने ढंग से राजधानी लखनऊ सहित एक दर्जन से अधिक शहरों में तथाकथित “वर्टिकल व्यवस्था” लागू की गई है। अब उसी व्यवस्था के कामकाज का जायजा लेने के लिए प्रबंधन ने अपने ही निदेशकों एवं प्रबंध निदेशकों को जिम्मेदारी सौंप दी है।
संघर्ष समिति ने चेतावनी दी है कि यदि हटाए गए संविदा कर्मियों को पुनः कार्य पर नहीं लिया गया और अभियंताओं, जूनियर इंजीनियरों एवं कर्मचारियों के निलंबन की कार्रवाई की गई, तो अप्रैल माह में प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन की होगी।
संघर्ष समिति का कहना है कि यह स्वाभाविक है कि प्रबंधन के ही अधिकारी, प्रबंधन द्वारा लागू की गई व्यवस्था में खामियां खोजने के बजाय उसकी प्रशंसा ही करेंगे। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।
संघर्ष समिति के अनुसार, वर्टिकल व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश की बिजली व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है और आने वाली गर्मियों में उपभोक्ताओं को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
संघर्ष समिति ने कहा कि पूरी दुनिया में उपभोक्ता सेवाओं के लिए “सिंगल विंडो सिस्टम” का सिद्धांत अपनाया जाता है, लेकिन पावर कॉरपोरेशन ने इस सुचारु व्यवस्था को समाप्त कर चार भागों में विभाजित कर दिया है। जिन शहरों में वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है, वहां बिजली आपूर्ति, बिलिंग, मीटरिंग, सबस्टेशन एवं लाइनों का रखरखाव अलग-अलग अधिकारियों को सौंप दिया गया है, जिससे जवाबदेही और समन्वय समाप्त हो गया है।
इसके अतिरिक्त, स्मार्ट प्रीपेड मीटर व्यवस्था ने उपभोक्ताओं की परेशानियां और बढ़ा दी हैं। कई मामलों में भुगतान के बाद भी बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हो रही है, और सिंगल विंडो सिस्टम खत्म होने से उपभोक्ता इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि प्रबंधन अपनी विफलताओं का ठीकरा अभियंताओं और कर्मचारियों पर फोड़ रहा है। वर्टिकल व्यवस्था के नाम पर— बड़े पैमाने पर संविदा कर्मियों को हटाया गया, नियमित पदों में कटौती की गई, सैकड़ों टीजी-2 कर्मचारियों को हटाया गया।
अब अभियंताओं के निलंबन की सूची तैयार की जा रही है। अलीगढ़ में एक कर्तव्यनिष्ठ मुख्य अभियंता का निलंबन इसका उदाहरण है, जिससे कर्मचारियों और इंजीनियरों में भारी रोष है।
संघर्ष समिति ने कहा कि अत्यंत अल्प वेतन पर कार्य करने वाले संविदा कर्मियों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा कर दिया गया है।
संघर्ष समिति का आरोप है कि पावर कॉरपोरेशन का शीर्ष प्रबंधन जानबूझकर गर्मियों से पहले ऊर्जा निगमों में अस्थिरता का माहौल बना रहा है, ताकि बिजली व्यवस्था बिगड़ने पर निजीकरण को उचित ठहराया जा सके। जिन शहरों में वर्टिकल व्यवस्था लागू की गई है, वहां आगे चलकर निजीकरण या अर्बन डिस्ट्रीब्यूशन फ्रेंचाइजी लागू करने की तैयारी की जा रही है।
संघर्ष समिति ने इसे विडंबना बताया कि वर्टिकल व्यवस्था लागू करने के बाद उसकी समीक्षा के लिए भी प्रबंधन ने अपने ही अधिकारियों को नियुक्त किया है।
केस्को में आज बिजली कर्मियों ने उत्पीड़न के विरोध में बिजली घर पर जोरदार प्रदर्शन किया और उत्पीड़न के विरोध में प्रबंधन को चेतावनी दी।
पूर्वांचल एवं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण के विरोध में बिजली कर्मियों का आंदोलन आज 486वें दिन भी जारी रहा और विभिन्न जनपदों में विरोध प्रदर्शन किए गए।


