
जिला संवाददाता देवेंद्र तिवारी
उन्नाव: उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ एक युवा जिंदगी ने समय से पहले ही मौत को गले लगा लिया। अजगैन कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले चूरमा गांव में शनिवार सुबह उस वक्त हड़कंप मच गया, जब ग्रामीणों ने एक युवक का शव गांव के बाहर आम के बाग में फंदे से लटका देखा। मृतक की पहचान सूरज (22 वर्ष) के रूप में हुई है। प्राथमिक जांच में आत्महत्या का कारण गहरा मानसिक तनाव और डिप्रेशन बताया जा रहा है।
बाग में लटका मिला शव, गांव में पसरा सन्नाटा
मिली जानकारी के अनुसार, चूरमा गांव निवासी सूरज पुत्र रामू, शुक्रवार रात को अपने घर से निकला था, लेकिन देर रात तक वापस नहीं लौटा। परिजनों ने सोचा कि शायद वह आसपास कहीं होगा, लेकिन शनिवार सुबह जब ग्रामीण खेतों की ओर निकले, तो उन्होंने सूरज का शव एक आम के पेड़ से लटका हुआ पाया।
शव देखते ही गांव में शोर मच गया और देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई। परिजनों को जैसे ही इसकी सूचना मिली, घर में कोहराम मच गया। सूरज की मां और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। गांव में इस घटना के बाद से ही मातम पसरा हुआ है।
पुलिस की कार्रवाई और मौके का मुआयना
सूचना मिलते ही अजगैन कोतवाली पुलिस दलबल के साथ मौके पर पहुंची। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से शव को पेड़ से नीचे उतरवाया और पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। पुलिस को मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, लेकिन शुरुआती पूछताछ में परिवार ने कुछ अहम जानकारियां दी हैं।
अजगैन पुलिस के मुताबिक:
युवक ने फांसी लगाने के लिए रस्सी का इस्तेमाल किया था।
प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का ही लग रहा है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मौत के सही समय और कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी।
डिप्रेशन बना जान का दुश्मन: परिजनों का बयान
परिजनों ने पुलिस को बताया कि 22 वर्षीय सूरज पिछले कुछ समय से काफी परेशान चल रहा था। वह अक्सर गुमसुम रहता था और किसी से ज्यादा बात नहीं करता था। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि सूरज मानसिक रूप से काफी दबाव महसूस कर रहा था और डिप्रेशन (अवसाद) का शिकार था। हालांकि, डिप्रेशन की असली वजह क्या थी—चाहे वह आर्थिक तंगी हो, करियर की चिंता या कोई व्यक्तिगत कारण—इसका खुलासा अभी नहीं हो पाया है।
22 साल की उम्र, जिसमें एक युवक के सामने पूरा भविष्य होता है, उस उम्र में सूरज का इस तरह दुनिया छोड़ जाना मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) के प्रति जागरूकता पर भी सवाल खड़े करता है।

