
आगरा।।उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के कालिंदी विहार इलाके में इन दिनों भीषण पेयजल संकट गहरा गया है। जल निगम की एक भारी चूक और योजना की कमी के कारण हजारों लोग पानी की एक-एक बूंद के लिए संघर्ष कर रहे हैं। मामला तीन दिन पहले का है जब क्षेत्र में स्थित एक पुरानी और जर्जर हो चुकी पानी की टंकी को ध्वस्त किया गया। महज 5 सेकेंड के भीतर विशालकाय टंकी मलबे के ढेर में तब्दील हो गई, लेकिन इस मलबे ने पूरे इलाके की जलापूर्ति व्यवस्था को ही ध्वस्त कर दिया।
5 सेकेंड का वीडियो और बरसों की मुसीबत
पानी की टंकी को गिराने का एक लाइव वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी में जर्जर टंकी को जमीन पर लाया गया। जैसे ही विस्फोट या मशीनरी के जरिए आधार को काटा गया, विशालकाय टंकी धूल के गुबार के साथ धराशायी हो गई। लेकिन इस ‘नियोजित’ ध्वस्तीकरण में एक बड़ी लापरवाही सामने आई। टंकी का भारी-भरकम मलबा सीधे नीचे बने अंडरग्राउंड टैंक (UGR) पर जा गिरा।
मलबे के दबाव और झटके के कारण अंडरग्राउंड टैंक बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। यह वही टैंक था जिससे पूरे कालिंदी विहार और आसपास के क्षेत्रों में पानी की सप्लाई की जाती थी। अब स्थिति यह है कि टंकी तो गिर गई, लेकिन सप्लाई लाइन और स्टोरेज टैंक टूटने से इलाके की प्यास बुझाने वाला सिस्टम ही ठप हो गया है।
तीन दिन से घरों में सूखा, जनता का फूटा गुस्सा
कालिंदी विहार क्षेत्र के निवासियों के लिए पिछले 72 घंटे किसी सजा से कम नहीं रहे हैं। सोमवार से शुरू हुआ पानी का संकट बुधवार तक जारी है। घरों में लगे नल पूरी तरह सूख चुके हैं। दैनिक कार्यों जैसे खाना बनाना, नहाना और साफ-सफाई के लिए लोग पानी के टैंकरों के भरोसे हैं। स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने टंकी गिराने से पहले वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की थी।
इलाके की महिलाओं का कहना है कि सर्दी के इस मौसम में पानी की किल्लत ने उनकी कमर तोड़ दी है। प्राइवेट टैंकर संचालक इस आपदा का फायदा उठा रहे हैं और मनमाने दाम वसूल रहे हैं। मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए रोजाना 500 से 1000 रुपये का पानी खरीदना मुमकिन नहीं है।
प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल
प्रलभ शरण चौधरी की रिपोर्ट के अनुसार, इस पूरी घटना ने जल निगम और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि जब टंकी को गिराने की योजना बनाई गई थी, तो सुरक्षा और अन्य बुनियादी ढांचे के बचाव का आकलन क्यों नहीं किया गया? मलबे को इस तरह क्यों गिरने दिया गया कि उसने मुख्य स्टोरेज टैंक को ही तोड़ दिया?
विशेषज्ञों का कहना है कि पुरानी संरचनाओं को गिराते समय ‘इम्पैक्ट जोन’ का ध्यान रखा जाता है। कालिंदी विहार के मामले में स्पष्ट रूप से लापरवाही बरती गई है। अब क्षतिग्रस्त टैंक की मरम्मत में लंबा समय लग सकता है, जिससे यह संकट और भी लंबा खिंचने की आशंका है।
टैंकरों के सहारे कट रही रातें
पानी की सप्लाई ठप होने के बाद नगर निगम ने कुछ टैंकर क्षेत्र में भेजे हैं, लेकिन हजारों की आबादी के सामने ये टैंकर ‘ऊंट के मुंह में जीरा’ साबित हो रहे हैं। टैंकर पहुँचते ही लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है और बाल्टियों के लिए छीना-झपटी जैसे हालात बन रहे हैं। कालिंदी विहार के कई अपार्टमेंट और कॉलोनियों में स्थिति बेहद खराब है क्योंकि वहां की मोटरें पानी न होने के कारण खाली चल रही हैं।
मरम्मत कार्य में देरी से आक्रोश
जल निगम के अधिकारियों का दावा है कि मरम्मत का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है, लेकिन धरातल पर मलबे को हटाने में ही काफी समय लग रहा है। जब तक मलबा पूरी तरह साफ नहीं होता, तब तक अंडरग्राउंड टैंक की वास्तविक क्षति का पता लगाकर उसे ठीक करना चुनौतीपूर्ण है। स्थानीय पार्षदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि अगर अगले 24 घंटों में जलापूर्ति बहाल नहीं हुई, तो वे सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।


