लखनऊ: उत्तर प्रदेश में नशे के अवैध कारोबार और ‘कोडीन युक्त सिरप’ की तस्करी को लेकर विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी सनसनीखेज रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। इस रिपोर्ट के सामने आते ही सोमवार, 22 दिसंबर को यूपी विधानसभा के शीतकालीन सत्र में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। SIT ने दावा किया है कि इस बड़े ड्रग सिंडिकेट की जड़ें पिछली सरकारों के कार्यकाल तक फैली हुई हैं।

SIT रिपोर्ट के 5 बड़े दावे:
अखिलेश सरकार में जारी हुए लाइसेंस: रिपोर्ट के मुताबिक, सिंडिकेट के मास्टरमाइंड विभोर राणा को साल 2016 (सपा सरकार) में मैन्युफैक्चरिंग और डिस्ट्रीब्यूशन का लाइसेंस मिला था। कई ऐसी संदिग्ध फर्मों को लाइसेंस दिए गए जिनका इस्तेमाल तस्करी के लिए हुआ।
नेपाल बॉर्डर और मदरसा नेटवर्क: नेपाल सीमा पर मदरसा नेटवर्क और तस्करी के खिलाफ सख्ती के बाद आरोपियों ने अपना काम अस्थायी रूप से रोक दिया था। पकड़े जाने के डर से विभोर राणा ने एबॉट कंपनी से 1 करोड़ बोतलें वापस लेने की मांग की थी।
वाराणसी में मिला जखीरा: तस्करी का माल शुभम जायसवाल और मनोज यादव के वाराणसी स्थित गोदामों में खपाया जा रहा था। SIT ने यहाँ से भारी स्टॉक बरामद किया है।
हवाला और धर्मांतरण गिरोह का लिंक: इस सिंडिकेट में पैसे का लेन-देन हवाला नेटवर्क के जरिए होता था। साथ ही, नेपाल सीमा पर सक्रिय धर्मांतरण गिरोह के सरगना छांगुर का नाम भी इस तस्करी नेटवर्क से जुड़ा पाया गया है।
रूट का खुलासा: तस्करी का मुख्य जाल हिमाचल प्रदेश, पश्चिम बंगाल और झारखंड से होते हुए नेपाल सीमा से लगे यूपी के जिलों तक फैला था।
विधानसभा में भारी हंगामा, सपा का वॉकआउट: सोमवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही समाजवादी पार्टी (SP) के विधायकों ने कोडीन सिरप और नशे की लत का मुद्दा उठाया। सपा विधायकों ने इस पर विस्तृत चर्चा की मांग की, लेकिन संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना के इस बयान पर कि “कोडीन से यूपी में कोई मौत नहीं हुई”, विपक्षी विधायक उग्र हो गए।
सपा विधायक नारेबाजी करते हुए सदन के वेल (बीचों-बीच) में पहुंच गए, जिससे कार्यवाही बाधित हुई। डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने सपा पर पलटवार करते हुए उन्हें “एजेंडा-लेस पार्टी” बताया और कहा कि 2027 में जनता इन्हें वापस सैफई भेज देगी। वहीं मंत्री संजय निषाद ने कहा कि लाइसेंस केंद्र देता है, लेकिन कार्रवाई यूपी सरकार ने की और अपराधियों को जेल भेजा

