
कानपुर: औद्योगिक नगरी कानपुर से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने न केवल समाज की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि इंसानियत को भी शर्मसार कर दिया है। चौबेपुर ब्लॉक कैंपस में सोमवार शाम उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक आवारा कुत्ता एक नवजात शिशु के शव को अपने मुंह में दबाए घूमता नजर आया। दृश्य इतना भयावह था कि देखने वालों की रूह कांप गई। जिस मासूम ने अभी दुनिया में ठीक से आंखें भी नहीं खोली थीं, उसे पैदा होते ही अपनों ने ही मौत के मुंह में धकेल दिया।

कुत्ते के मुंह में था मासूम: पहचान करना भी मुश्किल
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, सोमवार शाम चौबेपुर ब्लॉक परिसर में एक कुत्ता किसी वस्तु को बुरी तरह नोंच रहा था। पास जाकर देखने पर लोगों के होश उड़ गए; वह एक नवजात शिशु का शरीर था। बच्चे के शरीर से ‘नाल’ (Umbilical Cord) तक अलग नहीं हुई थी, जिससे स्पष्ट है कि जन्म के चंद घंटों के भीतर ही उसे फेंक दिया गया था। कुत्ते ने मासूम के शव को इस कदर क्षत-विक्षत कर दिया था कि यह पहचानना भी मुश्किल हो गया कि वह बालक था या बालिका। स्थानीय लोगों ने तुरंत शोर मचाकर कुत्ते को भगाया और चौबेपुर थाना पुलिस को सूचित किया।
लोकलाज या अपराध? पुलिस खंगाल रही CCTV
सूचना मिलते ही चौबेपुर थाना इंचार्ज आशिष चौबे भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। फॉरेंसिक टीम ने साक्ष्य जुटाए और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पुलिस के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती यह पता लगाना है कि बच्चा किसका था और उसे वहां किसने फेंका।
हत्या या परित्याग: पुलिस इस बिंदु पर जांच कर रही है कि क्या बच्चा मृत पैदा हुआ था या उसे जिंदा ही मरने के लिए फेंक दिया गया था। यदि उसे जिंदा फेंका गया, तो यह हत्या की श्रेणी में आएगा।

अवैध संबंध या मजबूरी: आशंका जताई जा रही है कि लोकलाज के डर से या ‘अनचाही संतान’ होने के कारण किसी ने इस अमानवीय कृत्य को अंजाम दिया है।
CCTV पर नजर: थाना प्रभारी ने बताया कि ब्लॉक कैंपस और आसपास के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। साथ ही, हाल ही में प्रसव कराने वाली महिलाओं का डेटा भी स्थानीय अस्पतालों और आशा बहुओं से मांगा जा रहा है
ग्रामीणों का फूटा गुस्सा: ‘इंसानियत मर चुकी है’
इस घटना के बाद इलाके के लोगों में भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि सरकार और प्रशासन सुरक्षित प्रसव और बच्चों के संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रहे हैं, लेकिन फिर भी ऐसी घटनाएं समाज के माथे पर कलंक हैं। वहां मौजूद एक स्थानीय नागरिक ने भावुक होकर कहा, “अगर पालना नहीं था, तो कहीं सुरक्षित जगह छोड़ देते, लेकिन कुत्तों के आगे फेंक देना दरिंदगी की पराकाष्ठा है। क्या हम इतने संवेदनहीन हो चुके हैं कि एक नन्हीं जान हमें बोझ लगने लगी?”

