
संवाददाता सचिन पाण्डेय
उन्नाव। नवाबगंज कस्बे में मंगलवार को नगर पंचायत द्वारा चलाए गए अतिक्रमण हटाओ अभियान ने न सिर्फ प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए, बल्कि स्थानीय जनता में आक्रोश का माहौल भी बना दिया। यह अभियान, जो कि केवल कागजों तक सीमित था, असल में कस्बे की गंभीर समस्याओं से आंखें मूंदने का एक और उदाहरण बनकर रह गया।
फुटपाथों पर अतिक्रमण हटाने के नाम पर प्रशासन ने केवल कुछ चयनित दुकानों को हटाकर खानापूर्ति की। इस दौरान गंभीर और असली अतिक्रमणों पर कार्रवाई करने के बजाय, केवल उन स्थानों को निशाना बनाया गया जहां कार्रवाई करना आसान था।
अवैध टेम्पो स्टैंड : जो रोज़ाना जाम की समस्या बढ़ाते हैं।
साप्ताहिक बाज़ार सड़क पर फैलकर कस्बे के यातायात को बाधित करता है।
दुर्गा मंदिर रोड पर दुकानों का कब्जा : जो सड़क की मूल चौड़ाई पर असर डालते हैं।
अवैध मांस दुकानों का प्रसार जहां से उठती गंध और संक्रमण का खतरा क्षेत्रवासियों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर मुद्दा बन चुकी है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि अगर प्रशासन की नीयत सही होती, तो इन असल और खतरनाक अतिक्रमणों पर पहले कार्रवाई की जाती। लेकिन ऐसा प्रतीत हुआ कि प्रशासन ने सिर्फ “दिखावे” के लिए कुछ फुटपाथी दुकानों को हटाने की औपचारिकता निभाई।
अधिशाषी अधिकारी अनिल कुमार के नेतृत्व में किए गए इस अभियान में दुकानदारों को चेतावनी दी गई कि नाले के बाहर दुकान लगाने पर प्रतिदिन 500 रुपये का जुर्माना लगेगा। हालांकि, कार्रवाई के दौरान कुछ स्थानों पर दुकानदारों और अधिकारियों के बीच झड़पें भी हुईं, लेकिन असल अतिक्रमणों पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
नतीज : इस अभियान ने साबित कर दिया कि प्रशासन की नीयत केवल दिखावटी कार्रवाई करने की थी, और वास्तविक समस्याओं पर ध्यान देने के बजाय, उन्होंने औपचारिकताएं निभाने को प्राथमिकता दी।
कुल मिलाकर, नवाबगंज का अतिक्रमण हटाओ अभियान केवल एक और प्रशासनिक तमाशा बनकर रह गया, जिसने जनता की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

