
ब्यूरो ऋषभ तिवारी
लखनऊ, 14 सितंबर 2025।।
सर्वेश पाठक का अल्टीमेटम : पाकिस्तानी कलाकारों की भारत में एंट्री बर्दाश्त नहीं – श्रमिक करेंगे बहिष्कार, लखनऊ फिल्म महोत्सव में गूंजा राष्ट्रवादी स्वर
भारतीय जनता पार्टी प्रणित संगठन के राष्ट्रीय महासचिव एवं वाइस चेयरमैन – वन, पर्यावरण एवं जलवायु संवर्धन परिषद भारत सरकार, सर्वेश पाठक ने लखनऊ प्रवास के दौरान पाकिस्तान अभिनेताओं और फिल्मों को लेकर तीखा बयान दिया।
उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि भारत की फिल्म इंडस्ट्री राष्ट्रहित और श्रमिक हितों को सर्वोपरि रखे। यदि किसी भी रूप में पाकिस्तानी कलाकारों को भारत में मंच देने की कोशिश हुई तो श्रमिक संगठन उसे पूरी तरह नाकाम कर देंगे।
सर्वेश पाठक ने स्पष्ट चेतावनी दी –
“हमारे जवान सीमा पर शहादत दे रहे हैं और यहां पाकिस्तानी कलाकार नाम और पैसा कमाने आते हैं – यह अस्वीकार्य है। यह केवल फिल्म इंडस्ट्री का मसला नहीं बल्कि राष्ट्र की अस्मिता और श्रमिकों की आत्मा का प्रश्न है। पाकिस्तान कलाकारों और उनकी फिल्मों की लॉन्चिंग देश की संस्कृति और सुरक्षा दोनों के लिए घातक है। इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
उन्होंने सरकार से मांग की कि पाकिस्तान से आने वाले कलाकारों और फिल्मों पर पूर्ण प्रतिबंध लगे तथा उन फिल्म निर्माताओं व आयोजकों पर कठोर कार्रवाई हो, जो श्रमिकों की भावनाओं को ठेस पहुँचाकर ऐसे कलाकारों को बढ़ावा देते हैं।
श्रमिक हितों के संरक्षक के रूप में सर्वेश पाठक
सर्वेश पाठक ने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री की असली ताकत उसके श्रमिक हैं।
“जब श्रमिक यह ठान लें कि वे पाकिस्तानी कलाकारों के साथ काम नहीं करेंगे, तो किसी निर्माता की हिम्मत नहीं होगी कि वह उन्हें भारत बुलाए।”
उन्होंने आंदोलन की चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में सड़क से लेकर सिनेमाघरों तक राष्ट्रवादी आंदोलन छेड़ा जाएगा।
फिल्म महोत्सव में गूंजा पाठक का नेतृत्व
लखनऊ में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव कार्यक्रम में भी श्रमिकों और कलाकारों ने माननीय पाठक जी के नेतृत्व पर विश्वास जताया।
केंद्रीय फिल्म मजदूर यूनियन के अध्यक्ष बी. यन. तिवारी ने कहा:
“सर्वेश पाठक जमीनी नेता हैं, हमारे छोटे भाई की तरह हैं। उनके आने से श्रमिकों में नई ऊर्जा का संचार हुआ है।”
मशहूर फिल्म अभिनेता राकेश बेदी जी ने कहा:
“हमने जितना सुना था, उससे कहीं ज्यादा सर्वेश पाठक को जमीनी स्तर पर श्रमिकों को गले लगाकर काम करते हुए पाया। उनका कार्य अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायी है।”
वहीं फिल्म निर्देशक अयूब खान जी ने धन्यवाद देते हुए कहा:
“सर्वेश पाठक के नेतृत्व में जो फिल्म रिलीज होगी, उसमें फिल्म जगत को बड़ा योगदान मिलेगा और उनके नेतृत्व से श्रमिकों का भविष्य भी सशक्त होगा।”
निष्कर्ष
लखनऊ से उठी सर्वेश पाठक की यह हुंकार अब पूरे देश में गूंज रही है। सोशल मीडिया से लेकर समाचार चैनलों तक उनके राष्ट्रवादी रुख को सांस्कृतिक स्वाभिमान और श्रमिक शक्ति की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी माना जा रहा है कि इस बयान ने पाकिस्तान कलाकारों के बहिष्कार की बहस को निर्णायक मोड़ दे दिया है।


