
लखनऊ।।भारत की समृद्ध जनजातीय विरासत को सम्मान देने और उसे जनसामान्य तक पहुंचाने के उद्देश्य से बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) और उत्तर प्रदेश जनजातीय कल्याण विभाग के संयुक्त तत्वावधान में ‘जनजातीय गौरव वर्ष 2025’ का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन भगवान बिरसा मुंडा की शताब्दी जयंती के उपलक्ष्य में नवंबर माह में प्रस्तावित है, जिसमें समाज कल्याण विभाग की भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
सोमवार को BHU स्थित वीसी सभागार में आयोजित बैठक में समाज कल्याण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने जानकारी देते हुए बताया कि यह आयोजन न केवल जनजातीय संस्कृति और इतिहास को नई पहचान देगा, बल्कि आजीविका, युवा सशक्तिकरण और नीति-निर्माण में जनजातीय समुदायों की भागीदारी को भी प्रोत्साहित करेगा। उन्होंने बताया कि इस भव्य आयोजन में देश भर से जनजातीय कलाकार, छात्र, शोधकर्ता, नीति-निर्माता और समाजसेवी भाग लेंगे।
कार्यक्रम का फोकस जनजातीय संस्कृति के प्रदर्शन, सामाजिक संवेदनशीलता, जनजागरूकता, नवाचार आधारित आजीविका के अवसरों के सृजन, युवाओं को सशक्त बनाने तथा नीतिगत संवाद के माध्यम से समावेशी विकास पर होगा। आयोजन में उत्तर प्रदेश समाज कल्याण मंत्रालय के साथ-साथ संस्कृति मंत्रालय, भारतीय मानवविज्ञान सर्वेक्षण विभाग तथा विभिन्न सरकारी व शैक्षिक संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
‘जनजातीय गौरव वर्ष’ के अंतर्गत अनेक प्रमुख आयोजन व प्रतियोगिताएं प्रस्तावित हैं। इसमें “सांझी विरासत” – राष्ट्रीय जनजातीय सांस्कृतिक उत्सव, “आदि लखपति दीदी” महा सम्मेलन, जनजातीय उद्यमिता कॉन्क्लेव, आदि परिधान महोत्सव, जनजातीय फोटो प्रदर्शनी, लाइव पेंटिंग शो जैसी गतिविधियां शामिल होंगी। प्रतियोगिताओं में जनजातीय नृत्य, गायन, पेंटिंग, वाद-विवाद एवं निबंध लेखन जैसे विषयों को सम्मिलित किया गया है।
कार्यक्रम की तैयारी के लिए BHU के वीसी सभागार में आयोजित बैठक में विस्तृत रणनीति पर विचार-विमर्श किया गया। आयोजन से जुड़े सभी विभागों को समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने और समन्वय के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि ‘जनजातीय गौरव वर्ष 2025’ न केवल उत्तर प्रदेश बल्कि देशभर में एक ऐतिहासिक और प्रभावी आयोजन के रूप में स्थापित हो सके।



